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9 साल बाद भी ट्रैक पर नही पिंडारी ट्रैकिंग रूट
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बागेश्वर का पिंडारी ग्लेशियर। फाइल फोटो
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। वर्ष 2013 के जलप्रलय का सामना करने वाला पिंडारी ट्रैकिंग रूट नौ साल बाद भी पटरी पर नहीं लौटा है। इससे जहां ट्रैकिंग पर असर पड़ा है, वहीं स्थानीय पोर्टर और गाइडों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
पिंडारी ग्लेशियर के कारण जिले की पहचान है। कोरोना काल से पहले हर साल करीब 50 हजार ट्रैकर पिंडारी ग्लेशियर के दीदार के लिए जाते थे। गर्मियों में पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकरों से गुलजार रहता था। पिंडारी के साथ ही सुंदरढूंगा की ट्रैकिंग के लिए लोग जाते थे। इस रूट में द्वाली, खाती, धाकुड़ी समेत तमाम स्थानों में केएमवीएन, लोनिवि के गेस्टहाउसों के साथ ही ढाबों का संचालन होता था। स्थानीय लोगों को पोर्टर और गाइड के रूप में रोजगार मिलता था।
15-16 जून 2013 की आपदा ने ट्रैकिंग रूट को तबाह कर दिया। द्वाली में बना झूलापुल बाढ़ की भेंट चढ़ गया। ट्रैकिंग रूट बुरी तरह से तबाह हो गया। द्वाली में लोनिवि के गेस्टहाउस तक पिंडर नदी ने कटाव कर दिया। कोरोना के कारण वर्ष 2020 से ट्रैकिंग प्रभावित है। खाती निवासी तारा सिंह दानू बताते हैं कि ट्रैकिंग रूट तबाह होने से इलाके के दो सौ से अधिक पोर्टर और गाइडों की आजीविका प्रभावित हुई है। ट्रैकिंग रूट में बने होटल, ढाबे बंद हो गए हैं। बताते हैं कि द्वाली में लोनिवि झूलापुल का निर्माण कर रहा है। रास्तों की मरम्मत का काम भी चल रहा है, लेकिन बजट के अभाव में ट्रैकिंग रूट के मरम्मत में दिक्कत आ रही है। रूट कब दुरुस्त होगा और यह क्षेत्र सैलानियों से क्या फिर गुलजार होगा। यह स्थानीय लोगों के लिए बड़ा सवाल है।
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चुनावी चर्चा से गायब है पिंडारी का मुद्दा
बागेश्वर। 2013 में जलप्रलय से तबाही मची थी, उससे एक साल पहले सूबे में तीसरी विधानसभा गठित हुई थी। आज पांचवीं विधानसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन तबाह पिंडारी ग्लेशियर जो कि जिले के साहसिक पर्यटन का सबसे बड़ा आधार है। उसकी चर्चा कहीं नहीं हो रही है। राजनेताओं, राजनीतिक दलों के लोगों की जुबान पर भी पिंडारी ग्लेशियर की खुशहाली की बात नहीं है। आने वाली सरकार और जनप्रतिनिधि पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट की खुशहाली के लिए क्या कदम उठाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
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पिंडारी ग्लेशियर के कारण जिले की पहचान है। कोरोना काल से पहले हर साल करीब 50 हजार ट्रैकर पिंडारी ग्लेशियर के दीदार के लिए जाते थे। गर्मियों में पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकरों से गुलजार रहता था। पिंडारी के साथ ही सुंदरढूंगा की ट्रैकिंग के लिए लोग जाते थे। इस रूट में द्वाली, खाती, धाकुड़ी समेत तमाम स्थानों में केएमवीएन, लोनिवि के गेस्टहाउसों के साथ ही ढाबों का संचालन होता था। स्थानीय लोगों को पोर्टर और गाइड के रूप में रोजगार मिलता था।
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15-16 जून 2013 की आपदा ने ट्रैकिंग रूट को तबाह कर दिया। द्वाली में बना झूलापुल बाढ़ की भेंट चढ़ गया। ट्रैकिंग रूट बुरी तरह से तबाह हो गया। द्वाली में लोनिवि के गेस्टहाउस तक पिंडर नदी ने कटाव कर दिया। कोरोना के कारण वर्ष 2020 से ट्रैकिंग प्रभावित है। खाती निवासी तारा सिंह दानू बताते हैं कि ट्रैकिंग रूट तबाह होने से इलाके के दो सौ से अधिक पोर्टर और गाइडों की आजीविका प्रभावित हुई है। ट्रैकिंग रूट में बने होटल, ढाबे बंद हो गए हैं। बताते हैं कि द्वाली में लोनिवि झूलापुल का निर्माण कर रहा है। रास्तों की मरम्मत का काम भी चल रहा है, लेकिन बजट के अभाव में ट्रैकिंग रूट के मरम्मत में दिक्कत आ रही है। रूट कब दुरुस्त होगा और यह क्षेत्र सैलानियों से क्या फिर गुलजार होगा। यह स्थानीय लोगों के लिए बड़ा सवाल है।
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चुनावी चर्चा से गायब है पिंडारी का मुद्दा
बागेश्वर। 2013 में जलप्रलय से तबाही मची थी, उससे एक साल पहले सूबे में तीसरी विधानसभा गठित हुई थी। आज पांचवीं विधानसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन तबाह पिंडारी ग्लेशियर जो कि जिले के साहसिक पर्यटन का सबसे बड़ा आधार है। उसकी चर्चा कहीं नहीं हो रही है। राजनेताओं, राजनीतिक दलों के लोगों की जुबान पर भी पिंडारी ग्लेशियर की खुशहाली की बात नहीं है। आने वाली सरकार और जनप्रतिनिधि पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट की खुशहाली के लिए क्या कदम उठाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।