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तेंदुए के भय से महिलाओं ने छोड़ी खेती

Wed, 15 Apr 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)। Updated Wed, 15 Apr 2015 12:07 AM IST
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Leopard women left farming fear
देवनाई घाटी के रिठाड़ गांव की महिलाएं तेंदुए के भय से खेतों में अकेले काम नहीं कर है। शिकारी लखपत सिंह तीन दिन रिठाड़, भतेड़िया में रेकी कर रहे है। उन्हें फिलहाल तेंदुआ नजर नहीं आया। रावत ने सोमवार की रात इलेक्ट्रानिक टार्च से भतेड़िया गांव से तेंदुए को देखने के लिए सर्च किया।
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शिकारी लखपत सिंह रेंजर श्याम सिंह करायत, उनकी टीम ने अंबेडकर जयंती के दिन भतेड़िया, रिठाड़ के जंगल में रेकी की। उन्हें तेंदुआ नहीं दिखा। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए को आदमखोर घोषित करने की औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द तेंदुआ आदमखोर घोषित होने के साथ ही उसे मारने के आदेश मिलने की उम्मीद है। जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट ने बताया कि शिकारी रावत को घाटी के लोग भरपूर सहयोग दे रहे है। उन्होंने बताया कि शासन तेंदुए को आदमखोर घोषित करने के साथ ही मारने के आदेश देने में आखिरकार देरी क्यों कर रहा है।
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