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Bageshwar News: कुंजवाल ने महिला की मौत के मामले में प्रदेश सरकार को घेरा
Mon, 01 Dec 2025 12:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 01 Dec 2025 12:07 AM IST
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गोविंद कुंजवाल।
बागेश्वर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने अस्पताल में महिला की मौत मामले में प्रदेश सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासन में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। बागेश्वर जैसा हाल प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों का हो चुका है। प्रदेश में सरकारी शिक्षा भी बुरे दौर से गुजर रही है।
नगर में एक वैवाहिक समारोह में शिरकत करने पहुंचे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलने से महिला को बागेश्वर जिला अस्पताल भेजा गया। यहां आकर उससे चार हजार रुपये भी मांगे गए और उसकी जान भी नहीं बच सकी। ऐसी घटनाएं होना बेहद दुखदाई है। कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था का जो हाल है, वह प्रदेश में पिछले 50 साल में कभी नहीं हुई थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कराने की सुविधा नहीं है। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल से बाहर रेफर कर देते हैं। अगर किसी का जिला अस्पताल में इलाज किया गया तो ऐसा हाल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक नहीं हैं। विकासखंडों के कुछ स्कूलों में ही प्रधानाचार्य हैं। शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में प्रदेश से पलायन बढ़ रहा है। कहा कि यहां के लोगों ने यह सोचकर तो अलग प्रदेश की मांग नहीं की थी। जल्द हालात सुधारने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो आगे स्थिति अधिक गंभीर हो जाएगी।
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नगर में एक वैवाहिक समारोह में शिरकत करने पहुंचे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलने से महिला को बागेश्वर जिला अस्पताल भेजा गया। यहां आकर उससे चार हजार रुपये भी मांगे गए और उसकी जान भी नहीं बच सकी। ऐसी घटनाएं होना बेहद दुखदाई है। कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था का जो हाल है, वह प्रदेश में पिछले 50 साल में कभी नहीं हुई थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कराने की सुविधा नहीं है। सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल से बाहर रेफर कर देते हैं। अगर किसी का जिला अस्पताल में इलाज किया गया तो ऐसा हाल हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक नहीं हैं। विकासखंडों के कुछ स्कूलों में ही प्रधानाचार्य हैं। शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में प्रदेश से पलायन बढ़ रहा है। कहा कि यहां के लोगों ने यह सोचकर तो अलग प्रदेश की मांग नहीं की थी। जल्द हालात सुधारने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो आगे स्थिति अधिक गंभीर हो जाएगी।
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