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कुमाउनी बोलिक प्रति नई पीढ़ी में जबरदस्त जोश, उज्याव संगठनक करौ गठन
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बागेश्वर के देवकी लघु वाटिका में पुस्तकालय का शुभारंभ करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बागेश्वर में हो रहे तेरहवें राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन में युवाओं में कुमाउनी भाषा के प्रति जोश देखने को मिला। युवाओं ने अपनी बोली, अपनी पछ्याण (पहचान) को कायम रखने के लिए उज्याव नामक संगठन का गठन किया। सम्मेलन में विद्वानों ने कुमाउनी भाषा के संरक्षण के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए।
सम्मेलन के दौरान युवा कवि कमल कवि कांडपाल, ललित तुलेरा, दीपक सिंह भाकुनी, भाष्कर भौर्याल, केनू टाकुली, ज्योति भट्ट आदि ने उज्याव संगठन की रूपरेखा सामने रखी। कमल कवि कांडपाल ने बताया कि संगठन कुमाउनी भाषा और संस्कृति की अलख जगाने का काम करेगा। उन्होंने नव युवकों से संगठन से जुड़ने की अपील की।
सम्मेलन में हरीश चंद्र पंत ने कुमाउनी पद्य के विकास और उत्थान पर प्रकाश डाला। रामनगर से आए नवेंदु मठपाल ने पाठ्यक्रम में कुमाउनी बोली को शामिल कर रोजगार से जोड़ने पर बल दिया। पहरू के संपादक हयात सिंह रावत ने कुमाउनी गद्य, पद्य साहित्य को अधिक से अधिक पढ़ने, लिखने और अंगीकृत करने पर बल दिया। डॉ. केएस रावत और गोपालकृष्ण जोशी के संचालन में हुए कार्यक्रम में नैनीताल से आए हेमंत बिष्ट, अल्मोड़ा से आए पीसी तिवारी, लखनऊ से आए ज्ञानचंद्र पांडेय (मेघ). मोहन चंद्र जोशी, किशन सिंह मलड़ा, शैलेंद्र धपोला, जमन सिंह बिष्ट, गोपाल दत्त भट्ट, कौस्तुभानंद चंदोला, जगदीश दफौटी, प्रेम प्रकाश उपाध्याय, आलोक पांडेय, हरीश सोनी, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख सुनीता टम्टा, रश्मि सैलवाल, गोपाल सिंह कन्याल आदि थे।
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झोड़ा-चांचरी की मची रही धूम
बागेश्वर। राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन में झोड़ा-चांचरी की धूम मची रही। लोक विधा के जानकार भास्कर भौर्याल के नेतृत्व में चांचरी का आयोजन किया गया। खोल माता खोल भवानी धरम किवाड़ा बोल के साथ ही तमाम बोलों में हुड़के की थाप पर चांचरी गायन किया गया। सम्मेलन में भानु तिवारी ने उत्तराखंड मेरी मातृभूमि गीत गाकर समा बांध दिया।
देवकी लघु वाटिका में कुमाउनी भाषा पुस्तकालय का शुभारंभ
बागेश्वर। मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिया में लोक गायक नैन नाथ रावल ने कुमाउनी भाषा, बोली और साहित्य पुस्तकालय का शुभारंभ किया। पुस्तकालय में तमाम विद्वानों की 300 से अधिक पुस्तकें रखी गई हैं। साहित्यकार वृक्षपुरुष किशन सिंह मलड़ा के नेतृत्व में सामूहिक पौधरोपण किया गया। कुमाउनी साहित्य के तमाम हस्ताक्षर कार्यक्रम में मौजूद रहे।
शिक्षक, साहित्यकार पवन ठकुराठी को किया सम्मानित
बागेश्वर। कुमाउनी भाषा के उत्थान में सहयोग देने के लिए आयोजकों ने शिक्षक, साहित्यकार पवन ठकुराठी को सम्मानित किया। पिथौरागढ़ के साहित्यकार दिनेश भट्ट की पुस्तक हमारा पर्यावरण और जैव विविधता पुस्तक, केशवानंद जोशी की पुस्तक मनसुब, दलीप सिंह खेतवाल की पुस्तक कुमाउनी संस्कृति सेवा सम्मान, कृपाल शीला गिरे कौतिक का विमोचन किया गया।
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सम्मेलन के दौरान युवा कवि कमल कवि कांडपाल, ललित तुलेरा, दीपक सिंह भाकुनी, भाष्कर भौर्याल, केनू टाकुली, ज्योति भट्ट आदि ने उज्याव संगठन की रूपरेखा सामने रखी। कमल कवि कांडपाल ने बताया कि संगठन कुमाउनी भाषा और संस्कृति की अलख जगाने का काम करेगा। उन्होंने नव युवकों से संगठन से जुड़ने की अपील की।
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सम्मेलन में हरीश चंद्र पंत ने कुमाउनी पद्य के विकास और उत्थान पर प्रकाश डाला। रामनगर से आए नवेंदु मठपाल ने पाठ्यक्रम में कुमाउनी बोली को शामिल कर रोजगार से जोड़ने पर बल दिया। पहरू के संपादक हयात सिंह रावत ने कुमाउनी गद्य, पद्य साहित्य को अधिक से अधिक पढ़ने, लिखने और अंगीकृत करने पर बल दिया। डॉ. केएस रावत और गोपालकृष्ण जोशी के संचालन में हुए कार्यक्रम में नैनीताल से आए हेमंत बिष्ट, अल्मोड़ा से आए पीसी तिवारी, लखनऊ से आए ज्ञानचंद्र पांडेय (मेघ). मोहन चंद्र जोशी, किशन सिंह मलड़ा, शैलेंद्र धपोला, जमन सिंह बिष्ट, गोपाल दत्त भट्ट, कौस्तुभानंद चंदोला, जगदीश दफौटी, प्रेम प्रकाश उपाध्याय, आलोक पांडेय, हरीश सोनी, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख सुनीता टम्टा, रश्मि सैलवाल, गोपाल सिंह कन्याल आदि थे।
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झोड़ा-चांचरी की मची रही धूम
बागेश्वर। राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन में झोड़ा-चांचरी की धूम मची रही। लोक विधा के जानकार भास्कर भौर्याल के नेतृत्व में चांचरी का आयोजन किया गया। खोल माता खोल भवानी धरम किवाड़ा बोल के साथ ही तमाम बोलों में हुड़के की थाप पर चांचरी गायन किया गया। सम्मेलन में भानु तिवारी ने उत्तराखंड मेरी मातृभूमि गीत गाकर समा बांध दिया।
देवकी लघु वाटिका में कुमाउनी भाषा पुस्तकालय का शुभारंभ
बागेश्वर। मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिया में लोक गायक नैन नाथ रावल ने कुमाउनी भाषा, बोली और साहित्य पुस्तकालय का शुभारंभ किया। पुस्तकालय में तमाम विद्वानों की 300 से अधिक पुस्तकें रखी गई हैं। साहित्यकार वृक्षपुरुष किशन सिंह मलड़ा के नेतृत्व में सामूहिक पौधरोपण किया गया। कुमाउनी साहित्य के तमाम हस्ताक्षर कार्यक्रम में मौजूद रहे।
शिक्षक, साहित्यकार पवन ठकुराठी को किया सम्मानित
बागेश्वर। कुमाउनी भाषा के उत्थान में सहयोग देने के लिए आयोजकों ने शिक्षक, साहित्यकार पवन ठकुराठी को सम्मानित किया। पिथौरागढ़ के साहित्यकार दिनेश भट्ट की पुस्तक हमारा पर्यावरण और जैव विविधता पुस्तक, केशवानंद जोशी की पुस्तक मनसुब, दलीप सिंह खेतवाल की पुस्तक कुमाउनी संस्कृति सेवा सम्मान, कृपाल शीला गिरे कौतिक का विमोचन किया गया।

बागेश्वर में चल रहे कुमाउनी भाषा सम्मेलन में उज्याव संगठन की जानकारी देते पदाधिकारी। संवाद न्यू- फोटो : BAGESHWAR