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नौकरी की तलाश छोड़कर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करें युवा: कोश्यारी
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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पैतृक गांव नाचतीचेटाबगड़ में स्वजनों के साथ। =
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। महाराष्ट्र के राज्यपाल और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का शामा में जोरदार स्वागत हुआ। पं. नेहरू इंटर कॉलेज में लोगों ने उनका सम्मान किया। इस दौरान कोश्यारी ने 15 मिनट तक कुमाऊंनी में लोगों को संबोधित किया और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने खेतीबाड़ी को कभी न बंद होने वाला रोजगार बताया और युवाओं से नौकरी छोड़कर खेतीबाड़ी में रोजगार खोजने को कहा।
अपने संबोधन में कोश्यारी ने पीएम मोदी को सैकड़ों वर्षों में मिलने वाला प्रधानमंत्री बताया। कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सबकी चिंता करते हैं। राज्यपालों की बैठक में भी वह प्रदेश की समस्याओं की जानकारी लेते हैं। उन्होंने कहा कि कपकोट सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्र में खेतीबाड़ी में अधिक अवसर हैं। यहां होने वाले उत्पादों की अधिक मांग रहती है। युवाओं को महानगरों में नौकरी की तलाश छोड़कर अपनी इस धरोहर खेतीबाड़ी को सहेजना होगा। कहा कि अब नौकरी बहुत कम है, अगर हम खेती और उद्यान में काम नहीं करेंगे तो हम पिछड़ जाएंगे। कहा कि पहले से कहते थे लड़का स्कूल जाएगा और लड़की काम करेगी। अब लड़कियां हर क्षेत्र में आगे हैं तो सबको काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि मुंबई में उत्तराखंड के 15 लाख लोग हैं, जबकि हिमाचल के केवल 50 हजार लोग हैं। हिमाचल के लोग आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने सेब के बगीचे बनाए, आड़ू उगाए और आत्मनिर्भर बने। वहां के किसानों ने अपने उत्पादों को पेटेंट कराया और 40 का उत्पाद 120 रुपये में विदेशों में बेच रहे हैं। उत्तराखंड में यह व्यवस्था लागू करनी है। हमारी कोशिश है कि उत्तराखंड के उत्पादों को जीआई टैंगिंग और पैकिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने स्वयं के सीएम और राज्यपाल तक के सफर को तय करने के पीछे क्षेत्रवासियों का प्रेम बताया और कहा कि लोगों के प्रेम और सहयोग से ही वह इतने ऊंचे पद तक पहुंचे। कार्यक्रम में विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिपं अध्यक्ष बसंती देव, ब्लॉक प्रमुख गोविंद दानू, पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश गढ़िया, पूर्व जिपं अध्यक्ष राम सिंह कोरंगा आदि थे।
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हम तो दनपुरिया हैं, कमाकर खाते हैं
बागेश्वर। अपने संबोधन में कोश्यारी ने दानपुर के लोगों को हाड़तोड़ मेहनत करने वाला बताया। कहा कि हम तो दनपुरिया हैं, कमाकर खातेे हैं। हमेशा से क्षेत्र के लोग खेतीबाड़ी कर आत्मनिर्भर जीवन जीते आए हैं। संवाद
उत्तम खेती, मध्यम पान
बागेश्वर। कोश्यारी ने कहा कि पहाड़ों में वर्षों से प्रचलित कहावत है कि उत्तम खेती मध्यम पान। यानी सबसे अच्छा कार्य खेतीबाड़ी है, जिसके बाद दुकानदारी फिर नौकरी। भीख मांगना सबसे बुरा कार्य है। कहा कि लॉकडाउन में दुकान, बस, रेल, सिनेमा सब बंद हो गए थे। सारे कारोबार चरमरा गए थे लेकिन खेतीबाड़ी बंद नहीं हुई।
महामहिम मत कहो, भगत दा कहो
बागेश्वर। संबोधन शुरू करते हुए राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि जिपं अध्यक्ष और पूर्व जिपं अध्यक्ष उन्हें महामहिम-महामहिम कह रहे थे, मैंने कहा मुझे महामहिम मत कहो, भगत सिंह या भगत दा कहो।
चार साल में 55 सड़क, 55 साल में कुछ नहीं
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि विधायक भौर्याल से उन्हें पता चला है कि कपकोट विधानसभा में इस समय 55 सड़कें बन रही हैं। चार साल में 55 सड़कें बन गई और 55 साल में कुछ भी नहीं बन पाया।
यहां तो सब जगह टीवी है, आदिवासी इलाकों में सड़क तक नहीं
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि अब तो उनके गांव सहित सब जगह टीवी है। कपकोट के गांव-गांव तक सड़क चली गई है। वहीं महाराष्ट्र के कई आदिवासी इलाकों में अब तक सड़क भी नहीं बनी है। उन इलाकों में संचार का भी कोई साधन नहीं है। कहा कि कपकोट के कुछ क्षेत्रों में संचार की दिक्कत है, जिसके लिए जियो कंपनी के टावर लग रहे हैं। जल्द ही संचार सुविधा शुरू हो जाएगी।
पैतृक आवास में गुजारी रात
बागेश्वर। इससे पूर्व राज्यपाल ने शुक्रवार की रात अपने पैतृक गांव में गुजारी। गांव से वह सुबह ध्नयाड़ी होते हुए शामा पहुंचे। शामा में लोगों ने उनका स्वागत किया। जिसके बाद वह कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उन्होंने संबोधन के दौरान इंटर कॉलेज में अपनी शिक्षा के दिनों को याद किया। कहा कि उस समय प्रेम व्यवहार बहुत था तो गलती होने पर शिक्षकों की छड़ी की मार भी पड़ती थी।
स्वायत्त सहकारिता का किया निरीक्षण
बागेश्वर। कोश्यारी ने शामा में दानपुर किसान एकता स्वायत्त सहकारिता का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सहकारिता के कार्यों की सराहना की। कहा कि जब वह सेवा पूरी कर लेंगे तो गांव आकर यही कार्य करेंगे। वह भी सहकारिता से जुड़कर कार्य करेंगे और लोकल में वोकल के इस अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। इस मौके पर सहकारिता के अध्यक्ष राजेंद्र कोरंगा, कोषाध्यक्ष धना कोरंगा, सचिव भूपेंद्र कोरंगा मौजूद रहे।
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अपने संबोधन में कोश्यारी ने पीएम मोदी को सैकड़ों वर्षों में मिलने वाला प्रधानमंत्री बताया। कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सबकी चिंता करते हैं। राज्यपालों की बैठक में भी वह प्रदेश की समस्याओं की जानकारी लेते हैं। उन्होंने कहा कि कपकोट सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्र में खेतीबाड़ी में अधिक अवसर हैं। यहां होने वाले उत्पादों की अधिक मांग रहती है। युवाओं को महानगरों में नौकरी की तलाश छोड़कर अपनी इस धरोहर खेतीबाड़ी को सहेजना होगा। कहा कि अब नौकरी बहुत कम है, अगर हम खेती और उद्यान में काम नहीं करेंगे तो हम पिछड़ जाएंगे। कहा कि पहले से कहते थे लड़का स्कूल जाएगा और लड़की काम करेगी। अब लड़कियां हर क्षेत्र में आगे हैं तो सबको काम करना होगा।
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उन्होंने कहा कि मुंबई में उत्तराखंड के 15 लाख लोग हैं, जबकि हिमाचल के केवल 50 हजार लोग हैं। हिमाचल के लोग आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने सेब के बगीचे बनाए, आड़ू उगाए और आत्मनिर्भर बने। वहां के किसानों ने अपने उत्पादों को पेटेंट कराया और 40 का उत्पाद 120 रुपये में विदेशों में बेच रहे हैं। उत्तराखंड में यह व्यवस्था लागू करनी है। हमारी कोशिश है कि उत्तराखंड के उत्पादों को जीआई टैंगिंग और पैकिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने स्वयं के सीएम और राज्यपाल तक के सफर को तय करने के पीछे क्षेत्रवासियों का प्रेम बताया और कहा कि लोगों के प्रेम और सहयोग से ही वह इतने ऊंचे पद तक पहुंचे। कार्यक्रम में विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिपं अध्यक्ष बसंती देव, ब्लॉक प्रमुख गोविंद दानू, पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश गढ़िया, पूर्व जिपं अध्यक्ष राम सिंह कोरंगा आदि थे।
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हम तो दनपुरिया हैं, कमाकर खाते हैं
बागेश्वर। अपने संबोधन में कोश्यारी ने दानपुर के लोगों को हाड़तोड़ मेहनत करने वाला बताया। कहा कि हम तो दनपुरिया हैं, कमाकर खातेे हैं। हमेशा से क्षेत्र के लोग खेतीबाड़ी कर आत्मनिर्भर जीवन जीते आए हैं। संवाद
उत्तम खेती, मध्यम पान
बागेश्वर। कोश्यारी ने कहा कि पहाड़ों में वर्षों से प्रचलित कहावत है कि उत्तम खेती मध्यम पान। यानी सबसे अच्छा कार्य खेतीबाड़ी है, जिसके बाद दुकानदारी फिर नौकरी। भीख मांगना सबसे बुरा कार्य है। कहा कि लॉकडाउन में दुकान, बस, रेल, सिनेमा सब बंद हो गए थे। सारे कारोबार चरमरा गए थे लेकिन खेतीबाड़ी बंद नहीं हुई।
महामहिम मत कहो, भगत दा कहो
बागेश्वर। संबोधन शुरू करते हुए राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि जिपं अध्यक्ष और पूर्व जिपं अध्यक्ष उन्हें महामहिम-महामहिम कह रहे थे, मैंने कहा मुझे महामहिम मत कहो, भगत सिंह या भगत दा कहो।
चार साल में 55 सड़क, 55 साल में कुछ नहीं
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि विधायक भौर्याल से उन्हें पता चला है कि कपकोट विधानसभा में इस समय 55 सड़कें बन रही हैं। चार साल में 55 सड़कें बन गई और 55 साल में कुछ भी नहीं बन पाया।
यहां तो सब जगह टीवी है, आदिवासी इलाकों में सड़क तक नहीं
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि अब तो उनके गांव सहित सब जगह टीवी है। कपकोट के गांव-गांव तक सड़क चली गई है। वहीं महाराष्ट्र के कई आदिवासी इलाकों में अब तक सड़क भी नहीं बनी है। उन इलाकों में संचार का भी कोई साधन नहीं है। कहा कि कपकोट के कुछ क्षेत्रों में संचार की दिक्कत है, जिसके लिए जियो कंपनी के टावर लग रहे हैं। जल्द ही संचार सुविधा शुरू हो जाएगी।
पैतृक आवास में गुजारी रात
बागेश्वर। इससे पूर्व राज्यपाल ने शुक्रवार की रात अपने पैतृक गांव में गुजारी। गांव से वह सुबह ध्नयाड़ी होते हुए शामा पहुंचे। शामा में लोगों ने उनका स्वागत किया। जिसके बाद वह कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उन्होंने संबोधन के दौरान इंटर कॉलेज में अपनी शिक्षा के दिनों को याद किया। कहा कि उस समय प्रेम व्यवहार बहुत था तो गलती होने पर शिक्षकों की छड़ी की मार भी पड़ती थी।
स्वायत्त सहकारिता का किया निरीक्षण
बागेश्वर। कोश्यारी ने शामा में दानपुर किसान एकता स्वायत्त सहकारिता का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सहकारिता के कार्यों की सराहना की। कहा कि जब वह सेवा पूरी कर लेंगे तो गांव आकर यही कार्य करेंगे। वह भी सहकारिता से जुड़कर कार्य करेंगे और लोकल में वोकल के इस अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। इस मौके पर सहकारिता के अध्यक्ष राजेंद्र कोरंगा, कोषाध्यक्ष धना कोरंगा, सचिव भूपेंद्र कोरंगा मौजूद रहे।