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Bageshwar News: प्रभारियों के भरोसे कपकोट की माध्यमिक शिक्षा
Fri, 22 May 2026 10:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 22 May 2026 10:16 PM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। क्षेत्र में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रही है। क्षेत्र के सभी 23 राजकीय इंटर कॉलेज बिना स्थायी प्रधानाचार्य के संचालित हो रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएमश्री योजना के तहत चयनित आदर्श विद्यालय बदियाकोट और कपकोट में भी लंबे समय से मुखिया का पद रिक्त पड़ा है, जिससे सरकार के दावों की पोल खुल रही है।
ब्लॉक के 13 जूनियर हाईस्कूलों में भी स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं हैं। वर्तमान में इन सभी विद्यालयों का संचालन पूरी तरह से प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों को प्रधानाचार्य का अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। स्थायी मुखिया न होने से स्कूलों में प्रशासनिक शिथिलता आ रही है और योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। अनुशासन, शिक्षण की गुणवत्ता और छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति पर इसका सीधा व विपरीत असर पड़ रहा है। प्रभार झेल रहे शिक्षकों का कहना है कि अपना मूल विषय पढ़ाने के साथ-साथ पूरे स्कूल की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने से उन पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बना हुआ है, जिससे वे बच्चों की पढ़ाई पर पूरा फोकस नहीं कर पा रहे हैं।
.....कोट
जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों और जूनियर हाई स्कूलों में प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों का मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। शिक्षकों की पदोन्नति और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शासन स्तर पर गतिमान है। जिले से रिक्तियों की सूची महानिदेशालय और शासन को भेजी जा चुकी है। - विनय कुमार सीईओ, बागेश्वर
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ब्लॉक के 13 जूनियर हाईस्कूलों में भी स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं हैं। वर्तमान में इन सभी विद्यालयों का संचालन पूरी तरह से प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों को प्रधानाचार्य का अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। स्थायी मुखिया न होने से स्कूलों में प्रशासनिक शिथिलता आ रही है और योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। अनुशासन, शिक्षण की गुणवत्ता और छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति पर इसका सीधा व विपरीत असर पड़ रहा है। प्रभार झेल रहे शिक्षकों का कहना है कि अपना मूल विषय पढ़ाने के साथ-साथ पूरे स्कूल की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने से उन पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बना हुआ है, जिससे वे बच्चों की पढ़ाई पर पूरा फोकस नहीं कर पा रहे हैं।
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जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों और जूनियर हाई स्कूलों में प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों का मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। शिक्षकों की पदोन्नति और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शासन स्तर पर गतिमान है। जिले से रिक्तियों की सूची महानिदेशालय और शासन को भेजी जा चुकी है। - विनय कुमार सीईओ, बागेश्वर
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