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राष्ट्रपति शासन लगते ही बंद हो गया जेसीबी से खनन
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:10 PM IST
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राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद गोमती में जेसीबी से अवैध खनन बंद हो गया है। नहीं तो इससे पहले सरकारी तंत्र में खूब अवैध खनन होता रहता था, जिससे आसपास के ग्रामीण खासे परेशान थे।
गोमती से रेता, पत्थर, चुगान अस्सी के दशक से बंद था। पूर्व सीएम हरीश रावत की सरकार ने इस बार गोमती में रेता खनन के पट्टे जारी कर दिए थे।
वर्तमान में नदी में आधा दर्जन से अधिक पट्टेधारक खनन कर रहे हैं। तैलीहाट और फुलवारी गूंठ के ग्रामीणों और प्रधानों ने पट्टेधारकों से जेसीबी से खनन नहीं करने के संबंध में कई बार कहा, लेकिन जेसीबी से बदस्तूर खनन जारी रहा। हालांकि गरुड़ के एसडीएम रवींद्र सिंह बिष्ट ने जनता की शिकायत पर कई बार छापा भी मारा और पट्टेधारकों को हिदायत दी कि जेसीबी से खनन न करें।
एसडीएम की हिदायत के बाबजूद पट्टे धारकों ने रात में जेसीबी से खनन करते रहे। इधर, फुलवारी गूंठ की प्रधान अनीता गोस्वामी, तैलीहाट की प्रधान कमला काला, दयाल काला आदि ने बताया कि राष्ट्रपति शासन जब से लागू हुआ तब से पट्टे धारक जेसीबी से खनन नहीं कर रहे है। ग्रामीणों ने राज्यपाल को पत्र भेजकर नये वित्तीय वर्ष में गोमती में खनन के सभी पट्टे निरस्त करने की मांग की है। वहीं एसडीएम बिष्ट ने कहा कि नदी में खनन करते पट्टेधारक के पास जेसीबी पाई गई तो पट्टा निरस्त करने साथ ही पट्टे धारक को जेल भेजा जाएगा।
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अवैध खनन के संबंध राज्यपाल से मिलूंगा : दास
विधायक चंदन दास ने बताया कि गोमती नदी में खनन पट्टे निरस्त करने के संबंध में वह शीघ्र राज्यपाल से मिलेंगे। गोमती में खनन कार्य का तैलीहाट, फुलवारी गूंठ, बैजनाथ, सिटोली, माल्दे, अणां, अकुणाई, कज्यूली आदि गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन अधिकांश युवा शामिल है। खनन से बैजनाथ मंदिर, बैजनाथ झील, बैजनाथ पुल और एक बहुत बड़ी आबादी को खतरा बना है। जिपं सदस्य शिव सिंह बिष्ट ने भी जेसीबी से खनन किए जाने का विरोध किया है।
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गोमती से रेता, पत्थर, चुगान अस्सी के दशक से बंद था। पूर्व सीएम हरीश रावत की सरकार ने इस बार गोमती में रेता खनन के पट्टे जारी कर दिए थे।
वर्तमान में नदी में आधा दर्जन से अधिक पट्टेधारक खनन कर रहे हैं। तैलीहाट और फुलवारी गूंठ के ग्रामीणों और प्रधानों ने पट्टेधारकों से जेसीबी से खनन नहीं करने के संबंध में कई बार कहा, लेकिन जेसीबी से बदस्तूर खनन जारी रहा। हालांकि गरुड़ के एसडीएम रवींद्र सिंह बिष्ट ने जनता की शिकायत पर कई बार छापा भी मारा और पट्टेधारकों को हिदायत दी कि जेसीबी से खनन न करें।
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एसडीएम की हिदायत के बाबजूद पट्टे धारकों ने रात में जेसीबी से खनन करते रहे। इधर, फुलवारी गूंठ की प्रधान अनीता गोस्वामी, तैलीहाट की प्रधान कमला काला, दयाल काला आदि ने बताया कि राष्ट्रपति शासन जब से लागू हुआ तब से पट्टे धारक जेसीबी से खनन नहीं कर रहे है। ग्रामीणों ने राज्यपाल को पत्र भेजकर नये वित्तीय वर्ष में गोमती में खनन के सभी पट्टे निरस्त करने की मांग की है। वहीं एसडीएम बिष्ट ने कहा कि नदी में खनन करते पट्टेधारक के पास जेसीबी पाई गई तो पट्टा निरस्त करने साथ ही पट्टे धारक को जेल भेजा जाएगा।
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अवैध खनन के संबंध राज्यपाल से मिलूंगा : दास
विधायक चंदन दास ने बताया कि गोमती नदी में खनन पट्टे निरस्त करने के संबंध में वह शीघ्र राज्यपाल से मिलेंगे। गोमती में खनन कार्य का तैलीहाट, फुलवारी गूंठ, बैजनाथ, सिटोली, माल्दे, अणां, अकुणाई, कज्यूली आदि गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन अधिकांश युवा शामिल है। खनन से बैजनाथ मंदिर, बैजनाथ झील, बैजनाथ पुल और एक बहुत बड़ी आबादी को खतरा बना है। जिपं सदस्य शिव सिंह बिष्ट ने भी जेसीबी से खनन किए जाने का विरोध किया है।