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डीएनए में पुष्टि न होने से आरोपी दोषमुक्त
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Wed, 17 Jun 2015 12:09 AM IST
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किशोरी के साथ बलात्कार के मामले में आरोपी का डीएनए पीड़िता के शिशु से न मिलने पर जिला सत्र न्यायालय ने उसे दोष मुक्त कर दिया है। न्यायालय ने पीड़िता को दो लाख रुपये की सहायता देने के आदेश सरकार को दिए हैं। साथ ही शिशु की सुरक्षा, परवरिश का फैसला लेने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दायित्व सौंपा है।
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किशोरी के पिता ने इसी साल 27 जनवरी को हरीश राम के खिलाफ कपकोट थाने में पाक्सो अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि आरोपी ने उनकी पुत्री के साथ बलात्कार किया, जिससे वह गर्भवती हो गई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जो पीड़िता के पास है। इसके बाद हरीश राम को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया।
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भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पाक्सो अधिनियम के तहत यह मामला जिले के विशेष सत्र न्यायालय में चला। आरोपी की कमजोर माली हालत को देखते हुए न्यायालय ने उन्हें दो न्यायमित्र जीबी उपाध्याय और सरकारी अधिवक्ता हरीश जोशी की मदद दिलाई। सोमवार को जिला सत्र न्यायाधीश डा. जीके शर्मा ने इस मामले में फैसला सुनाया।
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जिसमें कहा गया कि आरोपी और शिशु का डीएनए टेस्ट कराया गया। जिसका मिलान नहीं हो सका। इसी संदेह के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया, लेकिन पीड़िता किशोरी के भरण, पोषण, पुनर्वास के लिए दो लाख रुपये मुहैया कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए।
फैसले में कहा गया है कि अगर पीड़िता के परिजन उसके शिशु को नहीं अपनाते हैं तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इस बारे में पहल करे। प्राधिकरण के सचिव को उन्होंने शिशु के पुनर्वास के लिए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्राधिकरण के सचिव को पीड़िता की काउंसलिंग के भी आदेश दिए हैं।