{"_id":"5893721f4f1c1b953fe80459","slug":"i-reach-out-to-voters-in-a-cold-sweat-at-discount","type":"story","status":"publish","title_hn":"मतदाताओं तक पहुंचने में ठंड में भी छूट रहा पसीना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मतदाताओं तक पहुंचने में ठंड में भी छूट रहा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Thu, 02 Feb 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
ईवीएम
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले की कपकोट विधानसभा सीट भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम है। इस सीट में प्रत्याशियों को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए ठंड में भी पसीना बहाना पड़ रहा है। विधान सभा सीट के आधे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए हर प्रत्याशी एक दिन में चार से लेकर 20 किमी तक की पैदल दूरी नाप रहा है।
कपकोट विधान सभा क्षेत्र के अधिकांश गांव अभी यातायात सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। कपकोट में 93618 पुरुष और महिला मतदाता हैं। इनमें से आधे मतदाता दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। कपकोट के बोरबलड़ा, कुंवारी, दोबाड़, खलपट्टा, खलझूनी, कीमू, बाछम, बीथी, बघर, डौला, लाहुर सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां तक पहुंचने के लिए छह से 20 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। विधानसभा का बोरबलड़ा गांव सबसे अधिक 18 किमी की दूरी पर है।
गांव के अन्य तोकों के लिए कुछ किमी और चलना होता है। प्रत्याशियों को कुंवारी गांव तक 12 किमी पैदल चलना होगा। इसी तरह से पिंडर घाटी के कई गांवों तक पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्ते पार करने होंगे। इनमें कई मार्ग ऐसे भी हैं जिनमें जान जोखिम का खतरा भी बना रहता है। ऊंचाई वाले गांवों बोरबलड़ा, बदियाकोट, कुवांरी, किलपारा, तीख, डोला, सोराग, बाछम, खाती, खलपट्टा, खलझूनी, कीमू, गोगिना आदि में पिछले दिनों हुई बर्फबारी से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। चुनाव सिर पर हैं और एक-एक वोट कीमती है, ऐसे में प्रत्याशियों के लिए यह पैदल दूरी नापने की मजबूरी है। सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पहले इन दुर्गम गांवों में रहने वाले मतदाताओं तक पहुंचने की होड़ में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कपकोट विधान सभा क्षेत्र के अधिकांश गांव अभी यातायात सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। कपकोट में 93618 पुरुष और महिला मतदाता हैं। इनमें से आधे मतदाता दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। कपकोट के बोरबलड़ा, कुंवारी, दोबाड़, खलपट्टा, खलझूनी, कीमू, बाछम, बीथी, बघर, डौला, लाहुर सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां तक पहुंचने के लिए छह से 20 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। विधानसभा का बोरबलड़ा गांव सबसे अधिक 18 किमी की दूरी पर है।
विज्ञापन
गांव के अन्य तोकों के लिए कुछ किमी और चलना होता है। प्रत्याशियों को कुंवारी गांव तक 12 किमी पैदल चलना होगा। इसी तरह से पिंडर घाटी के कई गांवों तक पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्ते पार करने होंगे। इनमें कई मार्ग ऐसे भी हैं जिनमें जान जोखिम का खतरा भी बना रहता है। ऊंचाई वाले गांवों बोरबलड़ा, बदियाकोट, कुवांरी, किलपारा, तीख, डोला, सोराग, बाछम, खाती, खलपट्टा, खलझूनी, कीमू, गोगिना आदि में पिछले दिनों हुई बर्फबारी से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। चुनाव सिर पर हैं और एक-एक वोट कीमती है, ऐसे में प्रत्याशियों के लिए यह पैदल दूरी नापने की मजबूरी है। सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी पहले इन दुर्गम गांवों में रहने वाले मतदाताओं तक पहुंचने की होड़ में हैं।
विज्ञापन