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बिन पानी कैसे बुझेगी आग
अानंद बिष्ट उजाला ब्यूरो गरुड़ बागेश्वर
Updated Fri, 14 Apr 2017 10:33 PM IST
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फायर स्टेशन
- फोटो : amar ujala
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बरसों इंतजार के बाद गरुड़ कस्बे में फायर स्टेशन की स्थापना तो हुई लेकिन जरूरी इंतजाम आज भी अधूरे हैं। आग बुझाने के लिए सबसे जरूरी पानी की कोई ठोस व्यवस्था विभाग के पास नहीं है। फायर स्टेशन में रिजर्व टैंक और कर्मियों के लिए पेयजल की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। तहसील के प्रमुख स्थानों में भी जल संस्थान की योजनाओं में हाइड्रेंट न होने से विभाग की मुश्किलें कुछ ज्यादा बढ़ गई हैं।
शासन ने दो साल पूर्व गरुड़ फायर स्टेेशन के भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। फायर विभाग और जन प्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते फायर स्टेशन मानकों के तहत नहीं बना। विभाग ने फायर वास रुम आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थान पर बना दिया। जुलाई 2016 में हुई भीषण बारिश से निर्माणाधीन फायर स्टेशन का गैराज क्षतिग्रस्त हो गया था।
स्टेशन के प्रभारी रणवीर सिंह असवाल ने बताया कि वास रुम से भारी पंपों को गैराज तक लाने के लिए आठ से अधिक दमकल कर्मियों की जरूरत होती हैं। वास रुम पहाड़ी पर होने से पंपों को लाने में कभी भी कोई दमकल कर्मी घायल हो सकता है। यहां पर पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर में जब कभी आग लगेगी तो दमकल विभाग को पानी भरने तीन किमी दूर गोमती में जाना होगा। नगर में जल संस्थान की योजनाओं में एक भी हाइड्रेंट नहीं है। विधायक चंदन दास ने जल महकमे से शीघ्र कौसानी, गागरीगोल, डंगोली, लौबांज, टीट बाजार, बैजनाथ में हाइड्रेंट निर्माण की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए है। बता दें कि दो वर्ष पूर्व तक यहां आगजनी की घटना पर दमकल की टीम बागेश्वर से बुलानी पड़ती थी। टीम को गरुड़ और कौसानी पहुंचने में दो घंटा लग जाता था।
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दुर्घटना की सूचना देने का भी माध्यम नहीं है
गरुड़ (बागेश्वर)। फायर स्टेशन गरुड़ में टेलीफोन का लेंड लाइन संयोजन नहीं है। तहसील क्षेत्र में आग की कोई घटना घटे तो जनता दुर्घटना की सूचना फायर स्टेशन को नहीं दे पाएगी। स्टेशन 101 संयोजन से नहीं जुड़ा है। फायर स्टेशन के प्रभारी ने बताया कि लैंड लाइन संयोजन के लिए विभाग ने आवेदन किया है।
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शासन ने दो साल पूर्व गरुड़ फायर स्टेेशन के भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। फायर विभाग और जन प्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते फायर स्टेशन मानकों के तहत नहीं बना। विभाग ने फायर वास रुम आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थान पर बना दिया। जुलाई 2016 में हुई भीषण बारिश से निर्माणाधीन फायर स्टेशन का गैराज क्षतिग्रस्त हो गया था।
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स्टेशन के प्रभारी रणवीर सिंह असवाल ने बताया कि वास रुम से भारी पंपों को गैराज तक लाने के लिए आठ से अधिक दमकल कर्मियों की जरूरत होती हैं। वास रुम पहाड़ी पर होने से पंपों को लाने में कभी भी कोई दमकल कर्मी घायल हो सकता है। यहां पर पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर में जब कभी आग लगेगी तो दमकल विभाग को पानी भरने तीन किमी दूर गोमती में जाना होगा। नगर में जल संस्थान की योजनाओं में एक भी हाइड्रेंट नहीं है। विधायक चंदन दास ने जल महकमे से शीघ्र कौसानी, गागरीगोल, डंगोली, लौबांज, टीट बाजार, बैजनाथ में हाइड्रेंट निर्माण की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए है। बता दें कि दो वर्ष पूर्व तक यहां आगजनी की घटना पर दमकल की टीम बागेश्वर से बुलानी पड़ती थी। टीम को गरुड़ और कौसानी पहुंचने में दो घंटा लग जाता था।
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दुर्घटना की सूचना देने का भी माध्यम नहीं है
गरुड़ (बागेश्वर)। फायर स्टेशन गरुड़ में टेलीफोन का लेंड लाइन संयोजन नहीं है। तहसील क्षेत्र में आग की कोई घटना घटे तो जनता दुर्घटना की सूचना फायर स्टेशन को नहीं दे पाएगी। स्टेशन 101 संयोजन से नहीं जुड़ा है। फायर स्टेशन के प्रभारी ने बताया कि लैंड लाइन संयोजन के लिए विभाग ने आवेदन किया है।