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Bageshwar News: 1882 में शराब के प्रचलन से रुकी देवनाई घाटी की होली, अब तक नहीं हुई शुरू
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देवनाई की होली बंद होने से बुजुर्ग चिंतित
दिनेश नेगी
गरुड़(बागेश्वर)। देवनाई घाटी की होली, जो कभी क्षेत्र की सबसे बड़ी होली मानी जाती थी, वर्ष 1982 से बंद पड़ी है। शराब के बढ़ते प्रचलन और आपसी विवादों के कारण इस परंपरा को रोकना पड़ा। तब से अब तक होली का आयोजन नहीं हो पाया है, जिससे क्षेत्र के बुजुर्ग चिंतित हैं।
गरुड़ क्षेत्र के 10 गांवों में मनाई जाने वाली देवनाई घाटी की होली वर्ष 1881 से प्रसिद्ध थी। चतुर्दशी के दिन लोग कोटभ्रामरी मंदिर में इकट्ठा होकर होली गायन करते थे। अल्मोड़ा और चमोली जिले के लोग भी इस आयोजन में शामिल होते थे। हालांकि, शराब के प्रचलन से होली के दौरान मारपीट की घटनाएं बढ़ने लगीं, जिसके बाद बुजुर्गों ने इस परंपरा को बंद कर दिया।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि होली गायन की यह परंपरा पुनर्जीवित होनी चाहिए। सेवानिवृत्त कैप्टन अशोक सिंह बोरा ने कहा, शराब के कारण होली छूट गई। अब इसे फिर से शुरू करने की जरूरत है। ग्रामीण कैलाश बोरा ने कहा, होली गायन अब सपना बनकर रह गया है। युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना चाहिए।
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फोटो: देवनाई घाटी के ग्रामीणों के साथ होली गायन की पुरानी यादें।
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दिनेश नेगी
गरुड़(बागेश्वर)। देवनाई घाटी की होली, जो कभी क्षेत्र की सबसे बड़ी होली मानी जाती थी, वर्ष 1982 से बंद पड़ी है। शराब के बढ़ते प्रचलन और आपसी विवादों के कारण इस परंपरा को रोकना पड़ा। तब से अब तक होली का आयोजन नहीं हो पाया है, जिससे क्षेत्र के बुजुर्ग चिंतित हैं।
गरुड़ क्षेत्र के 10 गांवों में मनाई जाने वाली देवनाई घाटी की होली वर्ष 1881 से प्रसिद्ध थी। चतुर्दशी के दिन लोग कोटभ्रामरी मंदिर में इकट्ठा होकर होली गायन करते थे। अल्मोड़ा और चमोली जिले के लोग भी इस आयोजन में शामिल होते थे। हालांकि, शराब के प्रचलन से होली के दौरान मारपीट की घटनाएं बढ़ने लगीं, जिसके बाद बुजुर्गों ने इस परंपरा को बंद कर दिया।
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क्षेत्रवासियों का कहना है कि होली गायन की यह परंपरा पुनर्जीवित होनी चाहिए। सेवानिवृत्त कैप्टन अशोक सिंह बोरा ने कहा, शराब के कारण होली छूट गई। अब इसे फिर से शुरू करने की जरूरत है। ग्रामीण कैलाश बोरा ने कहा, होली गायन अब सपना बनकर रह गया है। युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना चाहिए।
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फोटो: देवनाई घाटी के ग्रामीणों के साथ होली गायन की पुरानी यादें।