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Bageshwar News: 11 महीने में जिले के सरकारी अस्पतालों में हुए 3,279 प्रसव
Thu, 06 Mar 2025 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:39 PM IST
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बागेश्वर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सुरक्षित प्रसव और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास रंग ला रहे हैं। जिले की अधिकतर गर्भवतियां प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल का सहारा ले रही हैं। पिछले 11 महीने में अस्पताल में 3,279 और घर में 186 प्रसव कराए हैं। पिछले दो महीने में विशेषज्ञ चिकित्सक के अवकाश पर रहने से 14 गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर भी करना पड़ा।
इस वर्ष जिले के सरकारी अस्पताल में बागेश्वर ब्लॉक से 1,381, कपकोट ब्लॉक से 982 और गरुड़ से 916 प्रसव हुए हैं। जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ की सुविधा होने से 192 गर्भवतियों को जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी की भी सुविधा मिली है। दूसरी ओर बागेश्वर में 36, गरुड़ में 31, कपकोट में 119 गर्भवतियों का घर में प्रसव हुआ है। एनएचएम की जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूता को 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्र की प्रसूता को 1,000 रुपये, ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 600 और शहरी क्षेत्र में 400 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य शिविर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और अस्पताल में जांच कराने के दौरान गर्भवतियों को संस्थागत प्रसव के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। कपकोट में दुर्गम क्षेत्र अधिक होने के कारण छह प्रसव केंद्र भी बनाए गए हैं।
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इस वर्ष जिले के सरकारी अस्पताल में बागेश्वर ब्लॉक से 1,381, कपकोट ब्लॉक से 982 और गरुड़ से 916 प्रसव हुए हैं। जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ की सुविधा होने से 192 गर्भवतियों को जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी की भी सुविधा मिली है। दूसरी ओर बागेश्वर में 36, गरुड़ में 31, कपकोट में 119 गर्भवतियों का घर में प्रसव हुआ है। एनएचएम की जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूता को 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्र की प्रसूता को 1,000 रुपये, ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 600 और शहरी क्षेत्र में 400 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
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सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य शिविर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और अस्पताल में जांच कराने के दौरान गर्भवतियों को संस्थागत प्रसव के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। कपकोट में दुर्गम क्षेत्र अधिक होने के कारण छह प्रसव केंद्र भी बनाए गए हैं।
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