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बागेश्वर में बगैर नशे वाली भांग की खेती शुरु, डीएम ने छाती गांव में किया शुभारंभ
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बागेश्वर के छाती गांव में भांग के बीज बोते डीएम विनीत कुमार। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले में बगैर नशे वाली लाइसेंसी भाग की खेती की शुरुआत हो गई है। डीएम विनीत कुमार ने छाती गांव में हैंप उत्पादन (भांग की खेती) का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भांग की खेती से किसानों की आय में इजाफा होगा और वह आर्थिक रूप से सक्षम बनेंगे। उन्होंने जिले के इच्छुक किसानों से भांग की खेती के लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अपील की है।
डीएम ने सोमवार को छाती गांव जाकर किसान राजेश चौबे के खेत में भांग का बीज बोकर नशारहित भांग की खेती का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिले में किसानों की आर्थिक मजबूत करने के उद्देश्य से हैंप उत्पादन प्रोजेक्ट बनाया गया है। पिछले वर्ष इसकी शुरुआत के लिए अनटाइड फंड से राशि स्वीकृत की गई। फिलहाल छाती-मनकोट के तीन किसानों को 10 नाली जमीन में भांग की खेती करने के लिए लाइसेंस जारी किए गए थे।
भांग की खेती करने के इच्छुक किसान आबकारी विभाग में आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद गठित कमेटी उनकी भूमि का सर्वे करेगी। इसके आधार पर लाइसेंस दिया जाएगा। भांग की खेती के लिए अधिक मेहनत की जरूरत नहीं है। भांग से रोटी, कपड़ा और मकान सभी जरूरतें पूरी होती है। इसके उपयोग से करीब पांच हजार उत्पाद बनाए जाते हैं। भांग की रेशों से किसान सौ रुपये प्रति किलो से चार हजार रुपये प्रति किलो तक कमा सकते हैं।
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कार्यक्रम में बांस एवं रेशा परिषद देहरादून से आए मास्टर ट्रेनर आशीष कुमार ने किसानों को भांग उत्पादन के बारे में बताया। पौधों के रखरखाव और भांग से आय अर्जित करने के बारे में बताया। कार्यक्रम के बाद डीएम ने किसान चौबे के सब्जी उत्पादन का निरीक्षण किया। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्या, जिला उद्यान अधिकारी आरके सिंह, तहसीलदार दीपिका आर्या, एडीओ उद्योग विभाग पंकज तिवारी, किसान दिनेश पांडेय आदि रहे।
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डीएम ने सोमवार को छाती गांव जाकर किसान राजेश चौबे के खेत में भांग का बीज बोकर नशारहित भांग की खेती का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिले में किसानों की आर्थिक मजबूत करने के उद्देश्य से हैंप उत्पादन प्रोजेक्ट बनाया गया है। पिछले वर्ष इसकी शुरुआत के लिए अनटाइड फंड से राशि स्वीकृत की गई। फिलहाल छाती-मनकोट के तीन किसानों को 10 नाली जमीन में भांग की खेती करने के लिए लाइसेंस जारी किए गए थे।
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भांग की खेती करने के इच्छुक किसान आबकारी विभाग में आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद गठित कमेटी उनकी भूमि का सर्वे करेगी। इसके आधार पर लाइसेंस दिया जाएगा। भांग की खेती के लिए अधिक मेहनत की जरूरत नहीं है। भांग से रोटी, कपड़ा और मकान सभी जरूरतें पूरी होती है। इसके उपयोग से करीब पांच हजार उत्पाद बनाए जाते हैं। भांग की रेशों से किसान सौ रुपये प्रति किलो से चार हजार रुपये प्रति किलो तक कमा सकते हैं।
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कार्यक्रम में बांस एवं रेशा परिषद देहरादून से आए मास्टर ट्रेनर आशीष कुमार ने किसानों को भांग उत्पादन के बारे में बताया। पौधों के रखरखाव और भांग से आय अर्जित करने के बारे में बताया। कार्यक्रम के बाद डीएम ने किसान चौबे के सब्जी उत्पादन का निरीक्षण किया। इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्या, जिला उद्यान अधिकारी आरके सिंह, तहसीलदार दीपिका आर्या, एडीओ उद्योग विभाग पंकज तिवारी, किसान दिनेश पांडेय आदि रहे।