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प्रकृति ने जमकर लुटाया पर सरकारों ने भुलाया

Fri, 22 Apr 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Fri, 22 Apr 2016 12:40 AM IST
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Governments forgotten
कफनी ग्ले‌शियर - फोटो : अमर उजाला

बागेश्वर। कपकोट ब्लाक के उत्तर में बुग्यालों के आंगन में खड़े कफनी ग्लेशियर की यात्रा तनमन को आनंदित कर देती है। हिमनद की सुंदरता पर चार चांद लगाने के लिए प्रकृति ने जमकर लुटाया है, लेकिन सरकारों ने सैलानियों की सुविधाओं देने के लिए कुछ खास नहीं किया है। यहां पहुंचने वाले देश विदेश के पर्यटकों को स्वर्ग की अनुभूति होती है। लोनिवि ने दो साल पहले आपदा की भेंट चढ़े पैदल रास्ते को ठीक करने की आज तक जहमत नहीं उठाई है। रास्ते की हालत दयनीय होने के कारण पर्यटकों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। 

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समुद्र सतह से करीब 12500 फीट की ऊंचाई पर स्थित कफनी हिमनद पिंडारी ग्लेशियर की अपेक्षा छोटा है, लेकिन यह अति मनोरम है। करीब 10 किमी क्षेत्र में फैले इस ग्लेशियर की ऊंचाई डेढ़ किमी है। यहां पहुंचने के लिए पर्यटकों को वाहन के जरिए जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर सोंग, वहां से तीन किमी लोहारखेत जाना पड़ता है। इसके बाद शुरू हो जाती है इस ग्लेशियर की साहसिक पदयात्रा। पर्यटक लोहारखेत से 11 किमी की पैदल चलकर धाकुड़ी पहुंचते हैं। रात्रि विश्राम के बाद वह दूसरे दिन सात किमी पैदल चलकर खाती पहुंचते हैं।
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रात्रि विश्राम के बाद वह दूसरे दिन 11 किमी द्वाली पहुंचते हैं। दूसरे रोज वह अत्यंत जोखिभरा रास्ते को पार करके 12 किमी कफनी जीरो प्वाइंट पहुंचते हैं। वहां रात्रि विश्राम की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण सैलानियों को खुले आसमान के नीचे ठंड के बीच रात काटनी पड़ती है। हिमनद के दर्शन के लिए तड़के पहुंचना होता है। सुबह सात बजे के बाद पहुंचने पर वहां घना कोहरा छा जाने से ग्लेशियर आंखों से ओझल हो जाता है।
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कफनी यात्रा मार्ग के लिए द्वाली से चार किमी दूर खटिया में जिला पंचायत ने करीब 25 लोगों के रहने के लिए गेस्ट हाउस का निर्माण किया है। यहां से दो किमी दूर बयाली में केएमवीएन ने हट बनाए हैं। कफनी के सैर को जाते समय पर्यटकों को द्वाली से कफनी और पिंडर ग्लेशियर के दर्शन होते हैं। मई के आखिरी सप्ताह में बर्फ पिघलने पर खूबसूरत झरने दृष्टिगोचर होते हैं। जंगल में लाल और काले रंग के बुरांश समेत कई अन्य मनमोहक फूल खिले रहते हैं।

सुगंधित जड़ी-बूटियां, कल-कल बहती कफनी और तरह तरह के पक्षियों की चहचहाहट तन-मन को प्रफुल्लित कर देती है। रास्ता अत्यंत विकट होने के कारण वहां गत दो साल से ग्लेशियर के दर्शन को काफी कम सैलानी जा रहे हैं। 

पिंडारी ग्लेशियर की तरह ही कफनी ग्लेशियर यात्रा मार्ग पर संचार की कोई सुविधा नहीं है। इससे पर्यटकों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दुर्भाग्य से यहां कोई दुर्घटना हो गई तो इसकी सूचना भी तहसील प्रशासन को तीसरे दिन मिलती है। समय से राहत नहीं मिलने पर प्रभावितों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

खटिया से जीरो प्वाइंट तक इस ग्लेशियर में एक नहीं कई मनोहारी बुग्याल हैं। पर्यटक मखमली हरी घास में नंगे पांव चलकर प्रकृति के अनमोल खजाने का भरपूर लुत्फ उठाते हैं। वह प्रकृति के अद्भुत नजारे को देख अभिभूत हो जाते हैं।


कफनी ग्लेशियर यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाएं नगण्य हैं। खाती गांव में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय में डाक्टर काफी समय से नहीं है। दुर्भाग्य से यदि किसी पर्यटक का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया या फिर चोटिल हो गया उसे तहसील मुख्यालय लाने में तीन दिन का समय लग जाता है 

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