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भेड़-बकरियों को भी मिलेंगे आधार नंबर
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कपकोट के बुग्याल में भेड़ चराता भेड़ पालक। फाइल फोटो
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर(दीप सिंह नेगी)। गाय, भैंस की तरह भेड़ और बकरियों को भी शीघ्र आधार नंबर मिलेगा। बागेश्वर पशुपालन विभाग में 1,22,875 टैग पहुंच चुके हैं। शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होते ही विभागीय कर्मचारी घर-घर जाकर चार माह से अधिक उम्र के भेड़, बकरियों की ईयर टैगिंग करेंगे। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) में पहले भेड़ों और बकरियों को शामिल नहीं किया गया था। गोवंश और महिष वंशीय पशु ही इसमें शामिल थे। अब भेड़, बकरियों को भी शामिल कर दिया गया है।
एनएडीसीपी के तहत पशुओं को इलाज की सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा पशुओं के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी आसानी से प्राप्त होगा। भेड़ और बकरी का रिकार्ड एनएडीसीपी के पोर्टल पर दर्ज रहेगा। भेड़ों-बकरियों की उम्र और पालने वाले का नाम और पता भी ऑनलाइन रहेगा। भेड़ों-बकरियों को 12 डिजिट का आधार नंबर का छल्ला कान में पहनाया जाएगा। इसके जरिये भेड़-बकरियों के बीमा और लोन की सुविधा भी मिलेगी।
खुरपका-मुंहपका के टीके लगेंगे
बागेश्वर। भेड़-बकरियों के आधार नंबर बनने से खुरपका-मुंहपका टीका लगाने में सुविधा मिलेगी। एनएडीसीपी के तहत गोवंश और महिष वंश की तरह भेड़-बकरी को भी टैग लगने के बाद टीके लगाए जाएंगे। साथ ही पशुओं के अन्य रोगों की जांच भी की जाएगी। बागेश्वर में 122875 भेड़-बकरियां हैं। इनमें 1,02,075 बकरी और 20,800 भेड़े हैं।
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बुग्याल जाने वाले भेड़-बकरियों को मिलेगी पहचान
बागेश्वर। पशुपालक हर वर्ष बुग्यालों में भेड़-बकरियों को चराने ले जाते हैं। इस दौरान पशुओं के खोने की आशंका बनी रहती है। कई पशु बीमार भी पड़ जाते हैं। आधार नंबर मिलने के बाद खोए पशुओं को ढूंढने में आसानी होगी। पशुपालकों के लिए भी यह लाभदायक रहेेगा।
भेड़-बकरियों के आधार नंबर पशु पालन विभाग में आ चुके हैं। शासन स्तर से निर्देश के बाद घर-घर जाकर भेड़-बकरियों के कानों में ईयर टैग लगाए जाएंगे। भेड़-बकरी पालकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। जिले में 80 प्रतिशत गौ और महिष वंशीय पशुओं को आधार नंबर मिल गया है। - डॉ. कमल पंत, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बागेश्वर
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एनएडीसीपी के तहत पशुओं को इलाज की सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा पशुओं के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी आसानी से प्राप्त होगा। भेड़ और बकरी का रिकार्ड एनएडीसीपी के पोर्टल पर दर्ज रहेगा। भेड़ों-बकरियों की उम्र और पालने वाले का नाम और पता भी ऑनलाइन रहेगा। भेड़ों-बकरियों को 12 डिजिट का आधार नंबर का छल्ला कान में पहनाया जाएगा। इसके जरिये भेड़-बकरियों के बीमा और लोन की सुविधा भी मिलेगी।
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खुरपका-मुंहपका के टीके लगेंगे
बागेश्वर। भेड़-बकरियों के आधार नंबर बनने से खुरपका-मुंहपका टीका लगाने में सुविधा मिलेगी। एनएडीसीपी के तहत गोवंश और महिष वंश की तरह भेड़-बकरी को भी टैग लगने के बाद टीके लगाए जाएंगे। साथ ही पशुओं के अन्य रोगों की जांच भी की जाएगी। बागेश्वर में 122875 भेड़-बकरियां हैं। इनमें 1,02,075 बकरी और 20,800 भेड़े हैं।
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बुग्याल जाने वाले भेड़-बकरियों को मिलेगी पहचान
बागेश्वर। पशुपालक हर वर्ष बुग्यालों में भेड़-बकरियों को चराने ले जाते हैं। इस दौरान पशुओं के खोने की आशंका बनी रहती है। कई पशु बीमार भी पड़ जाते हैं। आधार नंबर मिलने के बाद खोए पशुओं को ढूंढने में आसानी होगी। पशुपालकों के लिए भी यह लाभदायक रहेेगा।
भेड़-बकरियों के आधार नंबर पशु पालन विभाग में आ चुके हैं। शासन स्तर से निर्देश के बाद घर-घर जाकर भेड़-बकरियों के कानों में ईयर टैग लगाए जाएंगे। भेड़-बकरी पालकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। जिले में 80 प्रतिशत गौ और महिष वंशीय पशुओं को आधार नंबर मिल गया है। - डॉ. कमल पंत, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बागेश्वर