फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Girl storyteller in Bageshwar waking up to dharma

बागेश्वर में बालिका कथाकार जगा रही धर्मकर्म की अलख

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 12:26 AM IST
विज्ञापन
Girl storyteller in Bageshwar waking up to dharma
बागेश्वर की कथाकार बहनें। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। अपने जिले की बेटियां हर क्षेत्र में लोहा मनवा रही हैं। पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र कथा वाचन, धार्मिक अनुष्ठान जैसे कामों में भी उन्होंने महारत हासिल कर ली है। 10 युवतियां कथाकार व्यास की उपाधि भी हासिल कर चुकी हैं। इनमें से एक कथाकार तीन महीने तक अमेरिका में कथा कर चुकी हैं।
विज्ञापन

लोक भारती संस्थान के प्रयासों से 10 बालिका आचार्यों ने वृंदावन में नौ माह के कड़े प्रशिक्षण के बाद कथाकार व्यास की उपाधि हासिल की है। कथाकार बनने वाली बालिका आचार्यों (युवतियों) में लीती गांव की हंसा कोरंगा, सूपी की विमला टाकुली, भनार की तारा कोरंगा, फरसाली की कविता आर्या, हरसीला की मनीषा नेगी, रीमा की तारा देवी, दोफाड़ की दीपा देवी, ग्वालदम की रोशनी और घेटी गांव की चंपा और निशा शामिल हैं।
विज्ञापन

निशा ने कथाकार के रूप में जिले में प्रसिद्धि पाने के बाद अमेरिका में भी कथा की। वह तीन महीने तक प्रवासियों के बीच रहकर कथा प्रवचन करती रहीं। हालांकि कोरोना महामारी के चलते उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। वर्तमान में वह दिल्ली में स्वाध्याय कर रही हैं। उनका इरादा कोविड-19 का असर समाप्त होने के बाद दोबारा से अमेरिका लौटकर प्रवासी भारतीयों के बीच धर्म, संस्कृति और संस्कार का प्रचार-प्रसार करने का है। इन बालिका आचार्यों को कथाकार बहनों के नाम से जाना जाता है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

कोरंगा को जाता है एकल अभियान स्थापित करने का श्रेय
बागेश्वर। एकल विद्यालय अभियान को जिले में स्थापित करने का श्रेय जिले के प्रभारी और संस्था के कुमाऊं उपाध्यक्ष भगवत सिंह कोरंगा को जाता है। 18 साल पहले भराड़ी में उन्होंने पहला एकल विद्यालय खोला। इसके बाद अंचल (जिले) में संच (ग्रुप) बनाकर विद्यालय खोलने का सिलसिला शुरू हुआ। एक संच में 30 विद्यालय होते हैं। वर्तमान में तप्तकुंड, भराड़ी, हरसीला, शामा, दोफाड़, रीमा, रवांईखाल और घेटी संच के तहत विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।
एकल अभियान ने जिले की 270 महिलाओं को दिया रोजगार
बागेश्वर। जिले में 270 महिला आचार्य, नौ संच प्रमुख तैनात हैं। अंचल की टीम में जिला प्रभारी, अभियान प्रमुख, गतिविधि प्रमुख, प्रशिक्षण प्रमुख, कथा प्रमुख सहित कुल आठ लोगों की टीम काम करती है। प्रत्येक विद्यालय में तैनात आचार्य को संस्था की ओर से एक हजार रुपया दिया जाता है, जबकि संच प्रमुख और अन्य पदों पर सेवारत लोगों को भी व्यय के रूप में निश्चित राशि प्रदान की जाती है। (संवाद)
पंचमुखी शिक्षा देता है अभियान
बागेश्वर। एकल विद्यालय अभियान के तहत गांव के शिक्षित, योग्य व निर्धन युवक या युवती को आचार्य नियुक्त किया जाता है जो गांव के पंचायतघर या किसी अन्य स्थान पर सायंकाल एक घंटे की कक्षा का संचालन करता है। कक्षा में एक से आठवीं तक के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य शिक्षा, संस्कार शिक्षा और स्वाभिमान जागरण का पाठ पढ़ाया जाता है। इसके अलावा आचार्य ग्रामीणों को ग्राम विकास शिक्षा के तहत जैविक खेती, स्वच्छता और अन्य तमाम जनोपयोगी बातों की जानकारी देते हैं।

कोट
18 साल पहले लगाया एकल विद्यालय अभियान का पौधा अंचल ( जिले) में फल-फूल रहा है। कई बहनें अभियान से जुड़कर संस्कारी होने के साथ रोजगार भी प्राप्त कर चुकी हैं। भविष्य में पूरे अंचल में एकल स्कूल खोलकर संस्कारी शिक्षा और स्वाभिमान जागरण का लौ जलाने का प्रयास जारी रहेगा।- भगवत सिंह कोरंगा जिला प्रभारी, उपाध्यक्ष कुमाऊं क्षेत्र एकल विद्यालय अभियान।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed