फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Gaurav Pandey Became Councelar in Darbi

चामी के गौरव ने लंदन में चुनाव जीतकर बढ़ाया बागेश्वर का मान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 07 May 2021 11:58 PM IST
विज्ञापन
Gaurav Pandey Became Councelar in Darbi
अल्मोड़ा/बागेश्वर। बागेश्वर जिले के ग्राम चामी के मूल निवासी गौरव पांडे ने लंदन के डर्बी शहर में हुए निकाय चुनाव में काउंसलर पद पर जीत हासिल की है। लगातार पांच बार हारने के बाद छठे प्रयास में जीते गौरव ने अपनी जीत का श्रेय पत्नी गिन्नी सच्चर को दिया है। गौरव का कहना है कि सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम और कुुछ कर गुजरने की जिद होनी जरूरी है। अगर इरादा पक्का हो और मंजिल तय हो तो सफलता देर-सबेर मिलकर ही रहेगी।
विज्ञापन

चामी गांव के मूल निवासी स्व. हरीश चंद्र पांडेय और मंजुला पांडेय के पुत्र गौरव का जन्म ओडिसा में हुआ था। उनके पिता एमईएस में थे। बाद में उनका परिवार जम्मू जाकर बस गया। वर्ष 2003 में गौरव शेफ के तौर पर लंदन के डार्बी शहर चले गए। कुछ वर्ष बाद वह फूड हाइजीन संबंधी प्रशिक्षण देने लगे।
विज्ञापन

इसी दौरान उनका रुझान राजनीति की ओर हुआ और वह कंजर्वेटिव पार्टी से जुड़ गए। गौरव के परिवार में पत्नी गिन्नी सच्चर और दो बच्चे भी हैं। गौरव वर्ष 2015 से निकाय चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस बार उन्होंने 13 साल से जीत रहे पॉल जेम्स पेग को हराकर जीत हासिल की। पेग को 1034 जबकि गौरव को 1227 मत हासिल हुए। उन्होंने मैकवर्थ एंड मॉर्ले वार्ड से कंजर्वेटिव पार्टी के प्रत्याशी के रूप में यह चुनाव जीता है। निकाय चुनाव में गौरव समेत चार लोगों ने दावेदारी की थी।
गौरव के मामा मुकेश जोशी अल्मोड़ा में हुक्का क्लब के पास रहते हैं। मुकेश और उनके परिजनों ने गौरव की जीत पर खुशी जाहिर की। उक्रांद के केंद्रीय संगठन मंत्री गिरीश गोस्वामी ने भी गौरव की जीत पर प्रसन्नता जताई है।
लंदन तक चामी का ‘गौरव’ बढ़ा, परिवार का भी राजनीति से ताल्लुक
बागेश्वर। लंदन के डर्बी शहर में काउंसलर का चुनाव जीतने वाले चामी के मूल निवासी गौरव पांडेय के परिवार का भी राजनीति से संबंध रहा है। उनके दादा चंद्रबल्लभ पांडेय ने वर्ष 1973 में चामी गांव में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा था।
वर्ष 2003 में उनके चाचा महीप पांडेय गांव के प्रधान बने थे। गौरव की जीत पर गांव में जश्न का माहौल है। गौरव की मां और बहन उधमपुर में रहती हैं, उन्होंने गौरव की सफलता को उनकी अथक मेहनत और हार न मानने की जिद का प्रतिफल बताया है।
चामी गांव का नाम रोशन करने वाले गौरव का जीवन संघर्षों से भरा है। उन्होंने डर्बी शहर में कई वर्षों तक शेफ के रूप में काम किया। कई वर्षों के संघर्ष के बाद उन्होंने डर्बी शहर के निकाय चुनाव में काउंसलर का चुनाव जीतने में कामयाबी मिली।
उनकी इस सफलता पर गांव के साथ ही जिले में भी खुशी है। गौरव के चाचा और पूर्व प्रधान महीप पांडेय ने बताया कि पूरा गांव गौरव की जीत से उत्साहित है।
परिवार के सदस्यों सतीश पांडेय, हरिनंदन पांडेय, डॉ. पिंकी पांडेय, किरन पांडेय, लीला पांडेय आदि ने गांव में मिठाई बांटी। गौरव के चुनाव जीतने पर विधायक चंदन राम दास, जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार, पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद भट्ट आदि ने खुशी जताई है।
बचपन में तीन बार आए थे गांव
बागेश्वर। फोन पर हुई बातचीत में गौरव ने बताया कि वह बचपन में तीन बार चामी गांव आए थे। पहली बार वह वर्ष 1982 में आए थे। उस समय उनकी उम्र छह वर्ष थी।
दो साल बाद वर्ष 1984 में गांव में भोलेनाथ के जागर में शामिल होने के लिए वह परिवार के साथ आए थे। 11 वर्ष की उम्र में 1987 में वह एक बार फिर से गांव आए थे।
इसके बाद उनका गांव आना नहीं हो सका। हालांकि वर्ष 2017 में वह उत्तराखंड की सैर पर आए थे। इस दौरान वह जागेश्वर समेत नैनीताल और भीमताल में रहने वाले रिश्तेदारों से मिले थे।
मां और बहन को है मान
बागेश्वर। गौरव की माता मंजुला पांडेय और बहन मीना जम्मू के उधमपुर में रहते हैं। उनके बड़े भाई का परिवार अहमदाबाद में रहता है। गौरव के चुनाव जीतने पर मां और बहन बेहद खुश हैं।
आज भी गांव के नौले में नहाने की आती है याद
बागेश्वर। गौरव और उनकी बहन मीना ने फोन पर हुई बातचीत मेें बचपन में चामी गांव में बिताए कुछ दिनों को जीवन के बेहतरीन लम्हों में से एक बताया। गौरव ने बताया कि गांव आकर वह प्राकृतिक स्रोत नौले में जाकर नहाते थे।
इस दौरान वह नौले को तालाब समझकर कई बार डुबकी भी लगा देते थे। गांव तक पैदल जाने के दौरान रास्ते में चाय की दुकानों में मिलने वाले आलू के गुटके और बेर की झाड़ियों पर लगे बेर के फल भी उन्हें याद आते हैं।

मीना ने बताया कि गांव में जंगल जाकर दोनों भाई-बहन चीड़ की पत्तियों पर फिसलने का खेल करते थे। एक बार वह जंगल में भटक भी गए। बाद में परिवार वालों ने उन्हें खोजा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed