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जिला गठन के 24 साल बाद बागेश्वर को मिलेगा खेल स्टेडियम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Dec 2021 12:09 AM IST
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Fund Rileased For Bageshwar Stadium
बागेश्वर नगर। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिला गठन के 24 वर्ष बीतने के बाद जिला मुख्यालय में बहुप्रतीक्षित स्टेडियम के निर्माण की आस जग गई है। शासन ने चयनित वन भूमि के एवज में क्षतिपूरक राशि जमा करने के लिए 38 लाख रुपये खेल विभाग को जारी कर दिए हैं। यूपी निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बनाया गया है।
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15 सितंबर 1997 को अल्मोड़ा से अलग होकर बागेश्वर पृथक जिला बना। धीरे-धीरे कलक्ट्रेट, पुलिस स्टेशन, विकास भवन आदि परिसर अस्तित्व में आए। तमाम असुविधाओं के साथ ही खेल स्टेडियम न होने से युवा, खिलाड़ी और खेल प्रेमी काफी मायूस हैं। जन दबाव का ही असर कहेंगे कि वर्ष 2017 में जिले के दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिला मुख्यालय में खेल स्टेडियम का निर्माण कराने की घोषणा की।
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जिला मुख्यालय के नजदीक खोली में स्टेडियम के लिए जमीन चयनित की गई, लेकिन वन भूमि आड़े आ गई। हाल में वन भूमि का मामला सुलझा। खेल विभाग को इसके बदले पौधरोपण के लिए वन विभाग को 39 लाख 83 हजार 794 रुपये देने हैं। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। बीते 17 दिसंबर को अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने खेल निदेशक को भेजे पत्र में यह राशि स्वीकृत होने की जानकारी दी है।
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अब स्टेडियम के निर्माण के लिए बजट की आवश्यकता है। आचार संहिता लागू होने में कुछ ही समय बचा है। बजट कब स्वीकृत होता है। टेंडर प्रक्रिया कब निपटती है, कब काम शुरू होता है, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को इसका इंतजार है। जिला क्रीड़ाधिकारी वीएस वल्दिया का कहना है कि यूपी निर्माण निगम पहले से कार्यदायी संस्था नियत है। स्टेडियम के निर्माण की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ होगी। विधायक चंदन राम दास का कहना है कि जल्द ही स्टेडियम का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

खेल विभाग डिग्री कॉलेज और नुमाइशखेत मैदान पर निर्भर
बागेश्वर। जिला बनने के 24 साल और राज्य बनने के 21 साल बीतने के बाद भी जिला मुख्यालय में भी खेल स्टेडियम न होने से खिलाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खिलाड़ी ही क्या खेल विभाग भी डिग्री कॉलेज और नुमाइशखेत के मैदान पर निर्भर है। खेल विभाग की अधिकतर गतिविधियां डिग्री कॉलेज के मैदान में संपन्न होती हैं। अब देर-सबेर स्टेडियम अस्तित्व में आ ही जाएगा, ऐसी उम्मीद जाग गई है।
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