{"_id":"582b44684f1c1bd53b8fec7f","slug":"five-hundred-and-three-thousand-only-occurred-after-the-closure-of-the-registry","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच सौ व हजार के नोट बंद होने के बाद हुई मात्र तीन रजिस्ट्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच सौ व हजार के नोट बंद होने के बाद हुई मात्र तीन रजिस्ट्री
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Tue, 15 Nov 2016 10:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच सौ व हजार के नोट बंद होने का असर जमीनों की खरीद फरोख्त पर भी पड़ा है। पांच सौ व हजार के नोटों के बंद होने के बाद बागेश्वर जनपद में जमीन की मात्र तीन रजिस्ट्री हुई हैं। पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और दो प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क चुकाने के लिए रुपए नहीं होने से रजिस्ट्री का कार्य प्रभावित हो रहा है।
पर्वतीय क्षेत्र खासकर बागेश्वर में प्रापर्टी डीलिंग का अभी बड़ा बाजार नहीं है। गांवों से शहरों की ओर पलायन करने लोग यहां पर मकान बनाने के लिए आधा या एक नाली जमीन खरीदते हैं। जिला मुख्यालय बागेश्वर, कपकोट व कांडा तहसीलों में हर माह लगभग 60 ही रजिस्ट्री होती हैं। परंतु पांच सौ और एक हजार के नोटों के बंद होने के बाद रजिस्ट्री का यह औसत भी घटकर आधे से भी कम हो गया है। सब रजिस्ट्रार राजेंद्र मेहता ने बताया कि अक्तूबर माह में आवासीय, व्यावसायिक, कृषि कार्य से संबंधित लगभग 91 रजिस्ट्री हुई थी।
सामान्यतया अन्य महीनों में रजिस्ट्री का औसत प्रतिदिन दो रहता था। परंतु नोट बंद होने के बाद पिछले पांच दिनों में मात्र तीन रजिस्ट्री हुई हैं। उन्होंने बताया कि भूमि खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में पांच प्रतिशत और रजिस्ट्रेशन शुल्क दो प्रतिशत जमा करना पड़ता है। परंतु भूमि खरीददारों के पास रुपए नहीं होने से रजिस्ट्री का कार्य प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पर्वतीय क्षेत्र खासकर बागेश्वर में प्रापर्टी डीलिंग का अभी बड़ा बाजार नहीं है। गांवों से शहरों की ओर पलायन करने लोग यहां पर मकान बनाने के लिए आधा या एक नाली जमीन खरीदते हैं। जिला मुख्यालय बागेश्वर, कपकोट व कांडा तहसीलों में हर माह लगभग 60 ही रजिस्ट्री होती हैं। परंतु पांच सौ और एक हजार के नोटों के बंद होने के बाद रजिस्ट्री का यह औसत भी घटकर आधे से भी कम हो गया है। सब रजिस्ट्रार राजेंद्र मेहता ने बताया कि अक्तूबर माह में आवासीय, व्यावसायिक, कृषि कार्य से संबंधित लगभग 91 रजिस्ट्री हुई थी।
विज्ञापन
सामान्यतया अन्य महीनों में रजिस्ट्री का औसत प्रतिदिन दो रहता था। परंतु नोट बंद होने के बाद पिछले पांच दिनों में मात्र तीन रजिस्ट्री हुई हैं। उन्होंने बताया कि भूमि खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में पांच प्रतिशत और रजिस्ट्रेशन शुल्क दो प्रतिशत जमा करना पड़ता है। परंतु भूमि खरीददारों के पास रुपए नहीं होने से रजिस्ट्री का कार्य प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन