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Bageshwar News: मछली पालन का हब बन रहा कपकोट

Sat, 15 Jul 2023 12:09 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Sat, 15 Jul 2023 12:09 AM IST
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Fisheries in Kapakot Block
बागेश्वर के जगथाना में बने इन तालाबों में होता है ट्राउट मछली पालन। संवाद
बागेश्वर। मछली पालन के क्षेत्र में जिला लगातार तरक्की कर रहा है। पारंपरिक खेतीबाड़ी के साथ किसान आत्मनिर्भर बनने के लिए मछली पालन को अपना रहे हैं।
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कपकोट तहसील क्षेत्र के 10 गांवों में क्लस्टरवार मछली पालन का काम किया जा रहा है। 22 समितियों के माध्यम से 270 लोग मछली पालन कर आय अर्जित कर रहे हैं। जिला बनने से पूर्व लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ कम पहुंचता था। जिला बनने के बाद धीरे-धीरे लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचनी शुरू हुई। शुरूआत काफी धीमी रही लेकिन पिछले पांच-सात वर्षों में लोग विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने लगे हैं। खेती, पशुपालन और मछली पालन को कलस्टरवार शुरू करने के बाद से लोगों को इसका अच्छा लाभ मिल रहा है।
कपकोट के 10 गांवों में 22 समितियों के माध्यम से 220 तालाबों में क्लस्टरवार मछली पालन हो रहा है। प्रत्येक सोसायटी में कम से कम 10 लोग जुड़े हैं। साल में एक समिति को पांच से सात लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है।
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इन गांवों में हो रहा क्लस्टरवार मछली पालन
गांव का नाम - सोसायटी की संख्या - तालाब
जगथाना - सात - 70
बड़ेत - तीन - 30
लीती - दो - 20
रमाड़ी - दो - 20
चचई - दो - 20
फरसाली - दो - 20
लीली - एक - 10
भनार - एक - 10
तीख - एक - 10

ट्राउट, पंगास, कॉर्प मछली का हो रहा उत्पादन
बागेश्वर। जिले में हाइब्रिड ट्राउट, पंगास और कॉर्प मछली का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में हर साल करीब 270 क्विंटल कॉर्प, 90 क्विंटल ट्राउट और 40 क्विंटल पंगास मछली का उत्पादन हो रहा है। अधिकतर मछलियां स्थानीय बाजार में बेची जाती हैं। देहरादून की उत्तरा फिश शॉप में भी जिले से मांग के अनुसार ट्राउट मछली भेजी जाती है।
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फिश वैन और फिश कियोस्क बने मददगार
बागेश्वर। मछली उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विभाग के सहयोग से फिश वैन चल रही है। वैन में लोगों को मछली के बने उत्पाद मिलते हैं और मछली की भी बिक्री की जाती है। रमाड़ी में विभाग ने अभिनव प्रयोग कर मछली की दुकान (फिश कियोस्क) खोली है।


मछली तालाब बनाने के लिए मिलता है अनुदान
बागेश्वर। ट्राउट मछली के सीड जनवरी-फरवरी, जबकि पंगास और कॉर्प के सीड मार्च-अप्रैल में डाले जाते हैं। मछली के सीड या बीज विभाग निशुल्क देता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ट्राउट तालाब निर्माण के लिए अनुदान दिया जाता है। तीन लाख लागत के तालाब निर्माण के लिए सामान्य वर्ग को 40, एससी-एसटी को 60 प्रतिशत अनुदान मिलता है। जिला योजना और राज्य सेक्टर के तहत डेढ़ लाख रुपये लागत के तालाब निर्माण के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।


क्लस्टरवार मछली पालन से लोगों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। समितियों के माध्यम से मछली पालक पैदावार और विपणन में आपसी सहयोग कर रहे हैं। स्थानीय बाजार के अलावा जिले के बाहर भी मछली की आपूर्ति की जा रही है। कपकोट में चार समितियां और बनाई जाएंगी। विभाग मछली पालकों को हरसंभव सहयोग दे रहा है। भविष्य में अधिक से अधिक लोगों को मछली पालन से जोड़ा जाएगा। - मनोज मियान, वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक बागेश्वर।

बागेश्वर के जगथाना में बने इन तालाबों में होता है ट्राउट मछली पालन। संवाद

बागेश्वर के जगथाना में बने इन तालाबों में होता है ट्राउट मछली पालन। संवाद

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