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फायर सीजन से पहले ही सुलग रहे चीड़ के जंगल
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Sun, 12 Feb 2017 11:32 PM IST
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बागेश्वर-कांडा के बीच चीड़ के जंगलों में धधकी आग।
- फोटो : amar ujala
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चीड़ के जंगल फायर सीजन से पहले ही सुलगने लगे हैं। बागेश्वर और कांडा के बीच के वनों में पिछले कई दिनों से आग लगी हुई है। आग के कारण अब तक वन्य संपदा को भारी नुकसान पहुंच चुका है। फायर सीजन से पहले ही जंगलों में आग धधकने का कारण बारिश नहीं होना भी है।
15 फरवरी से फायर सीजन शुरू होता है। फायर सीजन में आग से कम नुकसान हो इसके लिए वन विभाग फायर सीजन से पहले कंट्रोल बर्निंग भी करता है लेकिन कंट्रोल बर्निंग का भी इस बार कोई फायदा नहीं हुआ। इस बार फायर सीजन शुरू होने से पहले ही बागेश्वर के कई जंगलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार की रात बागेश्वर और कांडा के बीच के जंगलों में भीषण आग लगी। लगभग पांच किमी तक रात भर चीड़ के जंगल सुलगते रहे। इससे पूर्व बागेश्वर और कपकोट रेंज में भी अब तक कई जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। बागेश्वर के नीलेश्वर पहाड़ी और मजियाखेत के पीछे वाली पहाड़ियां आग से काली पड़ चुकी हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बारिश नहीं होने से पिरुल सूखी है। सड़कों या पैदल मार्गों में आवाजाही करने वाले कुछ लोग इसमें आग लगा देते हैं। पिरुल के तेजी से जलने के कारण चीड़ के वनों की आग कई बार कंट्रोल नहीं हो पाती है।
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15 फरवरी से फायर सीजन शुरू होता है। फायर सीजन में आग से कम नुकसान हो इसके लिए वन विभाग फायर सीजन से पहले कंट्रोल बर्निंग भी करता है लेकिन कंट्रोल बर्निंग का भी इस बार कोई फायदा नहीं हुआ। इस बार फायर सीजन शुरू होने से पहले ही बागेश्वर के कई जंगलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार की रात बागेश्वर और कांडा के बीच के जंगलों में भीषण आग लगी। लगभग पांच किमी तक रात भर चीड़ के जंगल सुलगते रहे। इससे पूर्व बागेश्वर और कपकोट रेंज में भी अब तक कई जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। बागेश्वर के नीलेश्वर पहाड़ी और मजियाखेत के पीछे वाली पहाड़ियां आग से काली पड़ चुकी हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बारिश नहीं होने से पिरुल सूखी है। सड़कों या पैदल मार्गों में आवाजाही करने वाले कुछ लोग इसमें आग लगा देते हैं। पिरुल के तेजी से जलने के कारण चीड़ के वनों की आग कई बार कंट्रोल नहीं हो पाती है।
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