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फायर सीजन से पहले ही सुलगने लगे चीड़ के वन
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Wed, 18 Jan 2017 10:54 PM IST
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जंगलों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
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अभी फायर सीजन शुरू नहीं हुआ है लेकिन चीड़ के वनों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। मंगलवार की देर शाम घिंघारूतोला में चीड़ के जंगलों में आग सुलग गई। रात भर क्षेत्र के जंगल धूं-धू कर जलते रहे।
फायर सीजन हर साल 15 फरवरी से 15 जुलाई तक होता है। इस दौरान वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से फायर वाचरों की तैनाती की जाती है। परंतु अभी फायर सीजन शुरू होने में एक माह बाकी है। इसके बावजूद चीड़ के जंगलों में आग लगने का क्रम शुरू हो गया है। मंगलवार की शाम को घिंघारूतोला के चीड़ के जंगलों में आग लग गई। देर रात तक जंगल से आग की लपटें और धुएं के बादल नजर आते रहे। बारिश नहीं होने के कारण इस समय चीड़ के जंगलों के पिरूल सूखे हुए हैं। तीन दिन पूर्व जौलकांडे को जाने वाले पैदल मार्ग वाले जंगल में भी आग लग गई।
शीतकाल में कम बारिश होने को भी जंगलों में आग लगने का कारण माना जा रहा है। इसके चलते जंगलों में तेजी से आग की लपटें उठ रही हैं। इधर वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से कंट्रोल बर्निंग भी की जा रही है। कंट्रोल बर्निंग में वन कर्मी अपनी मौजूदगी में दिन में ऊपर से नीचे की ओर आग लगाते हैं। लेकिन कंट्रोल बर्निंग से पहले ही वनों में आग लगने से वन्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा है।
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18 बीजीएस 12 पी - बागेश्वर के घिंघारूतोला के जंगल में लगी आग।
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फायर सीजन हर साल 15 फरवरी से 15 जुलाई तक होता है। इस दौरान वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से फायर वाचरों की तैनाती की जाती है। परंतु अभी फायर सीजन शुरू होने में एक माह बाकी है। इसके बावजूद चीड़ के जंगलों में आग लगने का क्रम शुरू हो गया है। मंगलवार की शाम को घिंघारूतोला के चीड़ के जंगलों में आग लग गई। देर रात तक जंगल से आग की लपटें और धुएं के बादल नजर आते रहे। बारिश नहीं होने के कारण इस समय चीड़ के जंगलों के पिरूल सूखे हुए हैं। तीन दिन पूर्व जौलकांडे को जाने वाले पैदल मार्ग वाले जंगल में भी आग लग गई।
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शीतकाल में कम बारिश होने को भी जंगलों में आग लगने का कारण माना जा रहा है। इसके चलते जंगलों में तेजी से आग की लपटें उठ रही हैं। इधर वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से कंट्रोल बर्निंग भी की जा रही है। कंट्रोल बर्निंग में वन कर्मी अपनी मौजूदगी में दिन में ऊपर से नीचे की ओर आग लगाते हैं। लेकिन कंट्रोल बर्निंग से पहले ही वनों में आग लगने से वन्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा है।
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18 बीजीएस 12 पी - बागेश्वर के घिंघारूतोला के जंगल में लगी आग।