फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Farmers will be able to cut wheat crop twice

गेहूं की फसल को दो बार काट सकेंगे किसान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 12:14 AM IST
विज्ञापन
Farmers will be able to cut wheat crop twice
गरुड़ के कनस्यारी गांव में गेहूं के पौधों से चारा काटते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। किसान अब गेहूं की फसल को एक बार पशु चारे के लिए और दूसरी बार अनाज के लिए काट सकेंगे। यह संभव होगा गेहूं की वीएल प्रजाति से। इसे विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है। कृषि विज्ञान केंद्र की देखरेख में पहली बार इस जिले में गेहूं की इस प्रजाति की खेती की जा रही है। इससे किसान हरा चारा और अनाज दोनों ही प्राप्त कर सकेंगे।
विज्ञापन

विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत और उनके सहयोगियों ने वीएल 829 प्रजाति विकसित की है। इस प्रजाति के गेहूं की पर्वतीय क्षेत्र के सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्रों में खेती की जा सकती है। इससे गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। गेहूं के पौधे कुछ बड़े होने पर इन्हें एक बार चारे के लिए काटा जा सकता है। इसका उपज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिसंबर और जनवरी के महीने में पर्वतीय क्षेत्र में हरे चारे की काफी कमी रहती है। ऐसे में यह प्रजाति किसानों के लिए बहुत ही लाभकारी साबित हो सकती है।
विज्ञापन

कनस्यारी गांव में पशु चारे के लिए हुआ कटान
बागेश्वर। सोमवार को केवीके के वैज्ञानिकों की देखरेख में गागरीगोल के कनस्यारी गांव में किसान केशर सिंह भरड़ा के खेत में वीएल 829 प्रजाति के गेहूं को पशु चारे के लिए काटा गया। केवीके के प्रभारी अधिकारी डॉ. कमल कुमार पांडे, आत्मा परियोजना के उप परियोजना निदेशक धीरज बिष्ट ने किसानों को विभिन्न जानकारियां दीं। डॉ. पांडे ने बताया कि कनस्यारी, ह्वीलकुलवान, कपकोटी, नैछीबगड़ में तीन हेक्टेयर क्षेत्रफल में वीएल 829 गेहूं की प्रजाति का गेहूं बोया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोट
वीएल 829 गेहूं की प्रजाति में पीला और भूरा रतुवा रोग नहीं लगता। इस प्रजाति की खासियत यह है कि अक्तूबर के प्रथम पखवाड़े में बुवाई करने पर 70 से 90 दिनों में जमीन से 4-5 सेमी ऊपर से पैधा काटकर चारा प्राप्त किया जा सकता है। इस चारे से दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा।
-कमल कुमार पांडे, प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर (बागेश्वर)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed