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नौ साल बाद भी विभाग अनजान, गधेरे से पाइप लगाकर रोपाई कर रहे किसान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jun 2021 11:07 PM IST
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Even after nine years, the department is unaware, farmers are transplanting by planting pipes from the donkey
बागेश्वर। कपकोट नगर पंचायत क्षेत्र के 300 हेक्टेयर जमीन को सींचने वाली ऐठाण नहर नौ साल से क्षतिग्रस्त है। नहर में पानी नहीं चलने से रोपाई का काम बाधित हो गया है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है। जल स्रोत वाले स्थानों में लोग पाइप के सहारे रोपाई कर रहे हैं। अधिकतर किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हो गए हैं। किसानों ने सिंचाई विभाग से जल्द नहर की मरम्मत करने की मांग की है।
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देश और प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के दावे हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर किसानों की परेशानी को देखने की जहमत तक नहीं उठाई जा रही है। वर्ष 2012 में आई आपदा में कपकोट नगर पंचायत के चार वार्ड और ग्रामीण क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाली ऐठाण नहर ध्वस्त हो गई थी, जिसकी अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। सैकड़ों किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर हो गए हैं। सिंचाई नहीं होने से किसानों की उपज हर वर्ष कम होती जा रही है। जिस खेत में चार बोरी अनाज होता था, अब एक या डेढ़ बोरी तक सिमट कर रहा गया है। वहीं पानी नहीं मिलने से किसानों ने धान की रोपाई करना तक छोड़ दिया है। कुछ स्थानों पर जलस्रोत या गधेरा नजदीक होने से किसान पाइप के सहारे खेतों में पानी लाकर रोपाई कर रहे हैं। अन्य स्थानों पर सिंचाई के लिए किसान बारिश के पानी पर निर्भर हैं। अगर बारिश समय पर नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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खारबगड़ से हिचौड़ी तक है 12 किमी लंबी नहर
बागेश्वर। ऐठाण नहर कपकोट तहसील के सबसे बड़ी नहरों में से एक है। यह खारबगड़ से शुरू होकर हिचौड़ी वार्ड तक के खेतों को सींचती है। वर्ष 2012 में पिंडारी मोटर मार्ग में हुए भूस्खलन से नहर ध्वस्त हो गई थी, जिसकी मरम्मत के लिए कई बार प्रयास हुए, लेकिन अब तक नहर में पानी नहीं चलाया जा सका है। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से भानी, खाईबगड़, पालीडुंगरा, ऐठाण, बमसेरा, जाजर और हिचौड़ी के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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विधायक से सांसद तक लगा चुके हैं गुहार
बागेश्वर। सभासद प्रवीण सिंह ऐठानी, दीपक ऐठानी, हेमा देवी और डुंगर सिंह रावत ने बताया कि नहर से चार वार्ड और ग्रामीण क्षेत्र भानी में सिंचाई की जाती है। नहर टूटने के बाद से किसान ब्लॉक प्रमुख, नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष तक गुहार लगा चुके हैं। सब लोगों ने जल्द नहर की मरम्मत कराने का आश्वासन तो दिया, लेकिन नहर की हालात जस की तस है। वहीं सभासद प्रवीण ऐठानी ने बताया कि पालीडुंगरा वार्ड में सिंचाई के लिए विभाग से एक टैंक बनाया गया था, लेकिन उसमें पानी जाने के लिए नहर नहीं बनी। जिसके कारण वह टैंक सालों से खाली पड़ा हुआ है।

ऐठाण नहर की मरम्मत का प्रस्ताव जिला योजना के तहत रखा गया है। जल्द ही बजट पास होने पर नहर की मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। - एके जॉन, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग बागेश्वर।
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