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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Education, health, unemployment, migration major problem

शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, पलायन प्रमुख समस्या

Fri, 03 Feb 2017 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Fri, 03 Feb 2017 10:58 PM IST
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Education, health, unemployment, migration major problem
अमर उजाला परिचर्चा - फोटो : अमर उजाला

बागेश्वर। नया राज्य बनने के बाद छोटी काशी कहे जाने वाले बागेश्वर विधानसभा के लोगों को 2017 में चौथा विधायक मिल जाएगा लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि इन चुनावों में जनमुद्दों को कभी तवज्जो नहीं दी गई। चुनावी हार-जीत के कारणों की समीक्षा जनमुद्दों के बजाय, जातिगत समीकरण, क्षेत्रवाद, धनबल से की जाती है।

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बुद्धिजीवियों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, डॉक्टर विहीन अस्पताल, बेरोजगारी, पलायन जैसी समस्याएं बरकरार हैं। क्षेत्र में तमाम संभावनाओं के बाद भी रोजगार की नीति नहीं बनी। हजारों बेरोजगार युवा भटक रहे हैं। विधानसभा गठन के बाद जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने के लिए सभी वर्ग के लोगों को दबाव बनाने की जरूरत है।
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शुक्रवार को बागेश्वर प्रेस क्लब में आयोजित परिचर्चा में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों ने अपनी राय बेबाकी से रखी। उन्होंने कहा कि बागेश्वर छोटी काशी है। देश के अन्य धार्मिक नगरों की तरह इसका भी विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावों में जनता को बरगलाना, सपने दिखाना ही राजनैतिक दलों या प्रत्याशियों का काम रह गया है।
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चुनाव जीतने के बाद जनता की अनदेखी कर दी जाती है। शिक्षा का अभाव पलायन का बड़ा कारण बन रहा है। युवा वर्ग नशाखोरी की ओर बढ़ रहा है। बागेश्वर में स्वास्थ्य सुविधा बदहाल है। करोड़ों की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर, ब्लड बैंक तक संचालित नहीं हो पा रहे हैं। अधिकतर अस्पताल डॉक्टर विहीन हैं। स्कूल शिक्षक विहीन हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान न देने से दूर गांवों के लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने खेती को जंगली जानवरों से बचाने के लिए कोई उपाय न होने पर भी चिंता जताई। कहा कि हमारे जनप्रतिनिधि रोटी, कपड़ा, मकान की जरूरत तक को पूरा करने में समर्थ नहीं हैं। वास्तविक जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर अभिभावकों को आमरण अनशन करना पड़ रहा है। बागेश्वर में उद्योग-धंधे स्थापित हो सकते थे, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि ने इसका प्रयास नहीं किया। सभी प्रत्याशी उन राजनीतिक दलों के चहेते होते हैं, जिन्हें चुनाव जीतने के बाद जनसमस्याओं से कोई मतलब नहीं रहता है।


 पर्यटन की संभावनाओं के बावजूद पर्यटन को रोजगार से जोड़ने के प्रयास नहीं किए गए हैं। कहा कि अधिकारों के साथ ही कर्तव्यों की बात भी जरूरी है। सभी बुद्धिजीवियों ने कहा कि चुनाव के बाद राजनीतिक दलों की घोषणा कर उसकी समीक्षा की जाएगी। 

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