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Bageshwar News: परंपराओं का सुंदर नजारा, लोक संस्कृति की बिखेरी छटा
Mon, 15 Jan 2024 12:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 15 Jan 2024 12:28 AM IST
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बागेश्वर। बागेश्वर का विख्यात उत्तरायणी कौतिक शुरू हो गया है। मेले के शुभारंभ से पूर्व तहसील परिसर से नुमाइशखेत मैदान तक विविध संस्कृति की झलक दिखाती झांकी निकाली गई। कई स्कूल के छात्र-छात्राओं और लोक कलाकारों ने झांकी में लोक संस्कृति के रंग बिखेरे।
तहसील परिसर से पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने झांकी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। झांकी में सबसे आगे से कुली बेगार आंदोलन की तर्ज पर आयोजित तिरंगा यात्रा चली। हाथों में तिरंगा लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार के लोग यात्रा में शामिल थे। तिरंगा यात्रा के पीछे बालिकाओं की कलश यात्रा रवाना हुई। पारंपरिक रंग्वाली पिछौड़ा में सज-संवरकर आईं बालिकाओं ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति में कलश यात्रा के महत्व को प्रदर्शित किया।
नगर के कई स्कूल के विद्यार्थियों ने कलश यात्रा में गणेश महोत्सव, बैंड, नंदा राजजात, नंदा की डोली, बाल छलिया नृत्य, उत्तराखंड के लोक पर्व, मेरो मुलुक मेरो पहाड़, हमारी संस्कृति हमारी पछयाण, कुमाऊं की लोक संस्कृति, कुमाऊं की पारंपरिक वेशभूषा, कालिका तांडव, चार धाम यात्रा, शिव-पार्वती विवाह, झोड़ा-चांचरी, बंगाली सिंदूर खेला, घुघुति त्यार, नव दुर्गा के नौ रूप, छलिया नृत्य, राम दरबार, भिटौली, घोष, पंजाबी और बंगाली नृत्य की थीम प्रदर्शित की। वॉलीबाल खिलाड़ी और साइकिलिस्ट भी झांकी में शामिल थे।
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लोक कलाकारों ने किया मंत्रमुग्ध
बागेश्वर। धौलीनाग के छोल्यार सुरेश राम, बिलौना के शंकर राम, खोली के हरीश राम अपने ढोल, दमाऊ और छलिया नृतकों के साथ झांकी में शामिल हुए। गंगोलीहाट के छलिया नृतकों की टीम ने रोमांचक करतबों से झांकी देखने आए लोगों को मंत्रमुग्ध किया।
कनार का दमुआ रहा आकर्षण
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की झांकी में पिथौरागढ़ के कनार का दमुआ (नगाड़ा) आकर्षण का केंद्र रहा। एक क्विंटल से अधिक वजनी नगाड़े को दो लोग लकड़ी के डंडों की मदद से कंधे पर लेकर चल रहे थे। मोटी-मोटी लकड़ियों से जब नगाड़े पर थाप पड़ रही थी तो आसपास का क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था।
इन विद्यालयों के विद्यार्थी हुए झांकी में शामिल
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की झांकी में राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बागेश्वर, ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल बागेश्वर, राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर, राजकीय इंटर कॉलेज मंडलसेरा, जोहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति, पंडित दीन दयाल उपाध्याय पब्लिक स्कूल पुरड़ा, हिमालय चिल्ड्रंस एकेडमी नदीगांव, आनंदी एकेडमी मंडलसेरा, आनंदी एकेडमी घिरौली, विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मंडलसेरा, सेट जोसफ स्कूल थुनाई, राजकीय इंटर कॉलेज रवाईखाल, सैनिक हाईस्कूल बागेश्वर, न्यू सैनिक जूनियर हाईस्कूल सूरजकुंड, गायत्री विद्या मंदिर घिंघारूतोला, कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल कठायतबाड़ा, नेशनल मिशन इंटर कॉलेज चौरासी, हाईस्कूल बैड़ा मझेड़ा, सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज चौरासी और महर्षि विद्या मंदिर बिलौना के विद्यार्थियों ने कई थीम पर कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कला, संस्कृति और परंपरा का संगम
बागेश्वर। उत्तरायणी की झांकी तहसील परिसर से तहसील मार्ग होकर गोमती पुल, एसबीआई तिराहा, माल रोड, सरयू पुल, कांडा मार्ग, दुग बाजार होते हुए नुमाइशखेत मैदान में पहुंची। झांकी के दौरान करीब दो घंटे तक नगरवासियों को लोक कला, संस्कृति और परंपरा के विभिन्न स्वरूपों से रूबरू होने का मौका मिला। झांकी में शामिल विद्यार्थी जिस कौशल के साथ अपनी थीम का प्रदर्शन करते हुए कदमताल मिला रहे थे, वह नजारा मन मोहने वाला था।
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तहसील परिसर से पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने झांकी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। झांकी में सबसे आगे से कुली बेगार आंदोलन की तर्ज पर आयोजित तिरंगा यात्रा चली। हाथों में तिरंगा लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार के लोग यात्रा में शामिल थे। तिरंगा यात्रा के पीछे बालिकाओं की कलश यात्रा रवाना हुई। पारंपरिक रंग्वाली पिछौड़ा में सज-संवरकर आईं बालिकाओं ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति में कलश यात्रा के महत्व को प्रदर्शित किया।
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नगर के कई स्कूल के विद्यार्थियों ने कलश यात्रा में गणेश महोत्सव, बैंड, नंदा राजजात, नंदा की डोली, बाल छलिया नृत्य, उत्तराखंड के लोक पर्व, मेरो मुलुक मेरो पहाड़, हमारी संस्कृति हमारी पछयाण, कुमाऊं की लोक संस्कृति, कुमाऊं की पारंपरिक वेशभूषा, कालिका तांडव, चार धाम यात्रा, शिव-पार्वती विवाह, झोड़ा-चांचरी, बंगाली सिंदूर खेला, घुघुति त्यार, नव दुर्गा के नौ रूप, छलिया नृत्य, राम दरबार, भिटौली, घोष, पंजाबी और बंगाली नृत्य की थीम प्रदर्शित की। वॉलीबाल खिलाड़ी और साइकिलिस्ट भी झांकी में शामिल थे।
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लोक कलाकारों ने किया मंत्रमुग्ध
बागेश्वर। धौलीनाग के छोल्यार सुरेश राम, बिलौना के शंकर राम, खोली के हरीश राम अपने ढोल, दमाऊ और छलिया नृतकों के साथ झांकी में शामिल हुए। गंगोलीहाट के छलिया नृतकों की टीम ने रोमांचक करतबों से झांकी देखने आए लोगों को मंत्रमुग्ध किया।
कनार का दमुआ रहा आकर्षण
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की झांकी में पिथौरागढ़ के कनार का दमुआ (नगाड़ा) आकर्षण का केंद्र रहा। एक क्विंटल से अधिक वजनी नगाड़े को दो लोग लकड़ी के डंडों की मदद से कंधे पर लेकर चल रहे थे। मोटी-मोटी लकड़ियों से जब नगाड़े पर थाप पड़ रही थी तो आसपास का क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था।
इन विद्यालयों के विद्यार्थी हुए झांकी में शामिल
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की झांकी में राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बागेश्वर, ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल बागेश्वर, राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर, राजकीय इंटर कॉलेज मंडलसेरा, जोहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति, पंडित दीन दयाल उपाध्याय पब्लिक स्कूल पुरड़ा, हिमालय चिल्ड्रंस एकेडमी नदीगांव, आनंदी एकेडमी मंडलसेरा, आनंदी एकेडमी घिरौली, विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मंडलसेरा, सेट जोसफ स्कूल थुनाई, राजकीय इंटर कॉलेज रवाईखाल, सैनिक हाईस्कूल बागेश्वर, न्यू सैनिक जूनियर हाईस्कूल सूरजकुंड, गायत्री विद्या मंदिर घिंघारूतोला, कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल कठायतबाड़ा, नेशनल मिशन इंटर कॉलेज चौरासी, हाईस्कूल बैड़ा मझेड़ा, सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज चौरासी और महर्षि विद्या मंदिर बिलौना के विद्यार्थियों ने कई थीम पर कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कला, संस्कृति और परंपरा का संगम
बागेश्वर। उत्तरायणी की झांकी तहसील परिसर से तहसील मार्ग होकर गोमती पुल, एसबीआई तिराहा, माल रोड, सरयू पुल, कांडा मार्ग, दुग बाजार होते हुए नुमाइशखेत मैदान में पहुंची। झांकी के दौरान करीब दो घंटे तक नगरवासियों को लोक कला, संस्कृति और परंपरा के विभिन्न स्वरूपों से रूबरू होने का मौका मिला। झांकी में शामिल विद्यार्थी जिस कौशल के साथ अपनी थीम का प्रदर्शन करते हुए कदमताल मिला रहे थे, वह नजारा मन मोहने वाला था।