बागेश्वर। मातृ नवमी को सरयू तट पर माता का श्राद्ध करवाने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहा। पंडितों और पुरोहितों ने यजमानों के पितरों की शांति के लिए विधिविधान से श्राद्ध कराया। सामूहिक श्राद्ध के दौरान सरयू तट पर चहलपहल बनी रही।
श्राद्ध पक्ष के चलते इन दिनों बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपने घरों पर पंडितों को बुलाकर पूर्वजों का श्राद्ध कर्म करवा रहे हैं। हालांकि अष्टमी और नवमी तिथि के दिन सरयू तट पर खासी रौनक दिखी। अधिकांश लोग अष्टमी और नवमी को अपने पूर्वजों का श्राद्ध करवाते हैं। मातृ पक्ष का श्राद्ध पूरे पार्वण काल में केवल नवमी तिथि को ही होता है। जिसके चलते पंडितों को भी कई बार घर-घर जाकर श्राद्ध करवाने में दिक्कत होती है। ऐसे में पंडित यजमानों को सरयू तट पर आमंत्रित करते हैं। जहां पर कई यजमानों सामूहिक रूप से अपने पूर्वजों का श्राद्ध संपन्न कराते हैं। बृहस्पतिवार को भी पंडित हेम चंद्र जोशी, कैलाश उपाध्याय, शेखर चंद्र, मदन मोहन पांडेय, प्रकाश कांडपाल सहित कई पुरोहितों ने सरयू तट पर श्राद्ध संपन्न कराए। इस दौरान यजमानों ने भी माना कि अष्टमी और नवमी तिथि पर सामूहिक श्राद्ध करवाने से समय की बचत होती है। पंडितों ने कहा कि सरयू के पावन जल से तर्पण करने का भी विशेष महत्व है। जिसके चलते सरयू तट पर अष्टमी और नवमी को श्राद्ध करवाने का चलन भी बढ़ रहा है। यजमान और पुरोहित को भी इसमें आसानी होती है।