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Bageshwar News: एनडीपीएस अधिनियम का आरोपी दोषमुक्त
Wed, 02 Aug 2023 12:16 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 02 Aug 2023 12:16 AM IST
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बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम के आरोपी को दोषमुक्त किया है। न्यायालय ने मामले को लेकर वादी मुकदमा पर तल्ख टिप्पणी की और आरोपी के खिलाफ अमल में लाई गई कार्रवाई को दोषपूर्ण माना। एसपी को फैसले की प्रति भेजने का आदेश दिया।
जानकारी के अनुसार 12 फरवरी 2021 को कपकोट पुलिस ने एसआई अविनाश मौर्य के नेतृत्व में निजी वाहन से शाम को पौने आठ बजे क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला रही थी। रात के 8:50 बजे पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पोथिंग तिराहे से आरोपी रविंद्र सिंह निवासी कपकोट को 1.029 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया।
पुलिस आरोपी को कपकोट थाने लाई और वादी एसआई खुशवंत सिंह की तहरीर पर उसके खिलाफ 8/20 एनडीपीएस अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश कराए गए।
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आरोपी की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली में आए साक्ष्य के आधार पर कहा कि वादी मुकदमा की ओर से मौके पर प्रपत्र तैयार करने की बजाय केस दर्ज होने के और विवेचक को विवेचना सौंपने के बाद प्रपत्र तैयार करना दर्शित होता है। इससे निश्चित तौर पर अभियोजन कथानक संदेह के दायरे में आता है।
न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वादी मुकदमा की ओर से दूषित प्रक्रिया का पालन किए जाने से उनकी कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न उठना स्वाभाविक है। न्यायालय ने फैसले की एक प्रति एसपी को इस आशय से भेजने के आदेश दिए कि वह इस तथ्य पर विचार करे कि वादी मुकदमा की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया को देखते हुए आरोपी से की गई चरस बरामदगी दोषपूर्ण साबित हुई है। ऐसी विसंगतियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
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जानकारी के अनुसार 12 फरवरी 2021 को कपकोट पुलिस ने एसआई अविनाश मौर्य के नेतृत्व में निजी वाहन से शाम को पौने आठ बजे क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला रही थी। रात के 8:50 बजे पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पोथिंग तिराहे से आरोपी रविंद्र सिंह निवासी कपकोट को 1.029 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया।
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पुलिस आरोपी को कपकोट थाने लाई और वादी एसआई खुशवंत सिंह की तहरीर पर उसके खिलाफ 8/20 एनडीपीएस अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश कराए गए।
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आरोपी की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली में आए साक्ष्य के आधार पर कहा कि वादी मुकदमा की ओर से मौके पर प्रपत्र तैयार करने की बजाय केस दर्ज होने के और विवेचक को विवेचना सौंपने के बाद प्रपत्र तैयार करना दर्शित होता है। इससे निश्चित तौर पर अभियोजन कथानक संदेह के दायरे में आता है।
न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वादी मुकदमा की ओर से दूषित प्रक्रिया का पालन किए जाने से उनकी कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न उठना स्वाभाविक है। न्यायालय ने फैसले की एक प्रति एसपी को इस आशय से भेजने के आदेश दिए कि वह इस तथ्य पर विचार करे कि वादी मुकदमा की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया को देखते हुए आरोपी से की गई चरस बरामदगी दोषपूर्ण साबित हुई है। ऐसी विसंगतियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।