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बागेश्वर में होगी मूंगे की खेती: किसान बनेंगे आत्मनिर्भर, पुड़कुनी गांव में रेशम विभाग का ट्रायल रहा सफल
Mon, 19 May 2025 03:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
Updated Mon, 19 May 2025 03:38 PM IST
सार
बागेश्वर में रेशम विभाग का मूंगे की खेती का ट्रायल सफल हो गया है। जल्द किसान मूंगे की खेती कर आत्मनिर्भर बनेंगे। इसके लिए केंद्रीय सिल्क बोर्ड से स्वीकृति मिल गई है।
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रेशम। स्रोत- रेशम विभाग
विस्तार
बागेश्वर में रेशम विभाग का मूंगे की खेती का ट्रायल सफल हो गया है। जल्द किसान मूंगे की खेती कर आत्मनिर्भर बनेंगे। इसके लिए केंद्रीय सिल्क बोर्ड से स्वीकृति मिल गई है। प्रथम चरण में 50 किसान खेती करेंगे। धीरे-धीरे अन्य किसानों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसके अलावा मलबरी और ओक टसर की खेती से भी जोड़ा जाएगा।
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रेशम विभाग ने बागेश्वर नगर से करीब 30 किमी दूर पुड़कुनी में मूंगे की खेती का ट्रायल किया था। ट्रायल के सफल होने के बाद विभाग ने चार रुपये प्रति मूंगे के हिसाब से बिक्री की थी।जांच में पाया गया था कि यहां उत्पादित मूंगे की गुणवत्ता असम और मेघालय से काफी अच्छी है क्योंकि यहां उत्पादित मूंगा दो से तीन रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिक रहा है। अब रेशम विभाग तिमलाबाड़ा, चीराबगड़ गांव में मूंगे की खेती करेगा। प्रथम चरण में 50 किसानों को जोड़कर अन्य स्थानों पर भी मूंगे की खेती की जाएगी।
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बागेश्वर में मूंगे की खेती का ट्रायल सफल हो गया है। केंद्रीय सिल्क बोर्ड को भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। जल्द किसानों को इसकी खेती से जोड़ी जाएगा। इसके अलावा मलबरी और ओके टसर रेशम का भी उत्पादन बढ़ाया जाएगा। - ब्रिजेश रतूड़ी, निरीक्षक, रेशम विभाग बागेश्वर
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