{"_id":"581a10cd4f1c1b0e57436a6b","slug":"close-to-dispense-rations-kotedaron","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटेदारों ने राशन बांटना किया बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोटेदारों ने राशन बांटना किया बंद
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:12 PM IST
विज्ञापन
बंद पड़ी दुकाने
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खाद्यान्न के लिए धर्मकांटा लगाने, पुराने बिलों का भुगतान करने और कमीशन की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने प्रांतीय आह्वान पर यहां राशन बांटना बंद कर दिया है। हड़ताल के कारण कई दुकानों में ताले लटक गए हैं। इससे उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़नी भी शुरू हो गई है। संगठन ने मांगेें पूरी नहीं होने तक राशन किसी भी सूरत में नहीं बांटने का एलान किया हैं।
संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह मेहरा और सचिव गणेश रावत ने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत है लेकिन समाधान के बदले शासन से उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। जिले में कुल 405 सरकारी सस्ता गल्ले की दुकानेें हैं।
गल्ला विक्रेताओं ने कहा कि वह मानदेय देने, बीमा करने, स्टेशनरी का खर्चा देने और पुराने बिलों का शीघ्र भुगतान देने की मांग कई बार कर चुुके हैं लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार केंद्र की तरह एपीएल के खाद्यान्न में कमीशन न देेकर विक्रेताओं का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब वह खाद्यान्न का वितरण नहीं करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह मेहरा और सचिव गणेश रावत ने कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत है लेकिन समाधान के बदले शासन से उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। जिले में कुल 405 सरकारी सस्ता गल्ले की दुकानेें हैं।
विज्ञापन
गल्ला विक्रेताओं ने कहा कि वह मानदेय देने, बीमा करने, स्टेशनरी का खर्चा देने और पुराने बिलों का शीघ्र भुगतान देने की मांग कई बार कर चुुके हैं लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार केंद्र की तरह एपीएल के खाद्यान्न में कमीशन न देेकर विक्रेताओं का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब वह खाद्यान्न का वितरण नहीं करेंगे।
विज्ञापन