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चंडिका गुफा मंदिर में नवीं से 14वीं सदी तक की मूर्तियां मौजूद

Wed, 18 May 2016 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Wed, 18 May 2016 11:09 PM IST
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Chandika cave temple statues from the ninth to the 14th century
मंदिर का मुआयना करते अधिकारी - फोटो : amar ujala

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 क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी चंद्र सिंह चौहान अपनी टीम के साथ ठांगा गांव स्थित चंडिका गुफा मंदिर का मौका मुआयना किया। टीम ने यहां रखी मूर्तियों का बारीकी से अध्ययन किया। चौहान के अनुसार दक्षिणमुखी यह मंदिर संभवतया 200 साल पुराना प्रतीत होता है।

यहां रखी मूर्तियों में नृत्यरत गणेश और दो विष्णु मूर्तियों को छोड़कर अधिकतर खंडित हैं। ग्रामीण चाहेंगे तो खंडित मूर्तियों को जिला मुख्यालय पर बनने वाले संग्रहालय में रखवा सकते हैं। शासन की ओर से मंदिर में मां चंडिका की नई मूर्ति लगवाने के लिए पत्र लिखा जा सकता है। 
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क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी चौहान ने बुधवार को ठांगा ग्राम पंचायत स्थित चंडिका गुफा मंदिर का मुआयना किया। उन्होंने मूर्तियों को बारीकी से देखा। बताया कि मंदिर क्षेत्र 4120 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के भीतर कुल 21 मूर्तियां हैं। मूर्तियां 9वीं, 10वीं और 14वीं सदी के कत्यूरकालीन हैं। इनमें से नृत्यरत गणेश और भगवान विष्णु की दो प्रतिमाओं को छोड़कर अधिकतर खंडित हैं।
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ऐसा प्रतीत होता है कि करीब दो साल पहले इस क्षेत्र में आपदा आई होगी और उसमें मूर्तियों को नुकसान हो गया हो। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा शुभ नहीं मानी जाती है। यदि ग्रामीण चाहेंगे तो खंडित मूर्तियों को जिला मुख्यालय पर बनने वाले संग्रहालय में रखा जा सकता है। मंदिर में चंडिका की नई मूर्ति रखवाने के लिए आगे की कार्रवाई करने की कोशिश की जा सकती है। इस मौके पर ग्राम प्रधान सतीश उप्रेती, पंकज सिंह डसीला, पूरन भौर्याल और ललित उप्रेती ने चौहान से मंदिर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और यातायात की सुविधा के लिए प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की है। टीम में जगत सिंह मेहरा, चंदन राम आदि शामिल थे।


मंदिर क्षेत्र में हैं पर्यटन की अपार संभावनाएं
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के प्रभारी चंद्र सिंह चौहान के अनुसार चंडिका गुफा मंदिर क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। विभिन्न प्रजाति के पेड़ों के मध्य यह स्थल हर दृष्टि से मनोरम है। वह मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए बीडीओ और पर्यटन अधिकारी को पत्र लिखकर मंदिर क्षेत्र को सड़क से जोड़ने, मंदिर क्षेत्र का समतलीकरण करने, आदि के लिए प्रभावी कार्यवाही को कहेेंगे। इस स्थल का पर्यटन की दृष्टि से विकास होगा तो निश्चित तौर पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ेगी।
 
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