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नहरें बंद होने से किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Sun, 06 Nov 2016 10:39 PM IST
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ग्राम पंचायत खोली की सिंचाई गूल और नहरें पिछले लंबे समय से बंद पड़ी हैं। नहरों में पानी नहीं आने से किसान परेशान हैं। किसान ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर बंद पड़ी गूलों व नहरों को खोलने के लिए सिंचाई विभाग को निर्देशित करने की मांग की है।
खोली के ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के लिए बनी सिंचाई गूल और नहरों से खोली के साथ ही काकड़ा, भटोली और मिहिन्यां तक सिंचाई होती है। एक वर्ष पूर्व रुनीखेत-अमतोड़ा मोटर मार्ग के निर्माण के मलबे से गूल व नहरें बंद हो गई थी।
सिंचाई विभाग और पीडब्लूडी को कहने के बावजूद बंद पड़ी नहरों व गूलों को खोलने के प्रयास नहीं किए गए हैं। इसके चलते क्षेत्र के सैकड़ों परिवार खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं। परंतु समय पर बारिश नहीं होने और सूखे जैसी स्थिति होने के कारण फसलों का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
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सिंचाई की सुविधा नहीं होने से किसान अपने खेतों को बंजर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। प्रधान कुंवर सिंह, राम सिंह, सोबन सिंह, पूरन चंद्र, हेम चंद्र कांडपाल, कमल सिंह, चंदन सिंह, हरीश सिंह, लछम राम, प्रकाश राम सहित क्षेत्र के सभी काश्तकारों ने शीघ्र बंद पड़ी नहरों को खोलने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र सिंचाई सुविधा नहीं मिली तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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खोली के ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत के लिए बनी सिंचाई गूल और नहरों से खोली के साथ ही काकड़ा, भटोली और मिहिन्यां तक सिंचाई होती है। एक वर्ष पूर्व रुनीखेत-अमतोड़ा मोटर मार्ग के निर्माण के मलबे से गूल व नहरें बंद हो गई थी।
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सिंचाई विभाग और पीडब्लूडी को कहने के बावजूद बंद पड़ी नहरों व गूलों को खोलने के प्रयास नहीं किए गए हैं। इसके चलते क्षेत्र के सैकड़ों परिवार खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं। परंतु समय पर बारिश नहीं होने और सूखे जैसी स्थिति होने के कारण फसलों का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
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सिंचाई की सुविधा नहीं होने से किसान अपने खेतों को बंजर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। प्रधान कुंवर सिंह, राम सिंह, सोबन सिंह, पूरन चंद्र, हेम चंद्र कांडपाल, कमल सिंह, चंदन सिंह, हरीश सिंह, लछम राम, प्रकाश राम सहित क्षेत्र के सभी काश्तकारों ने शीघ्र बंद पड़ी नहरों को खोलने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र सिंचाई सुविधा नहीं मिली तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।