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लोकगीत, लोक संस्कृति, लोकवाद्यों के संरक्षण और संवर्धन में जुटे हैं युवा भौर्याल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 12:09 AM IST
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Bhaskar Bhauryal the Youth For Calture
भाष्कर भौर्याल। - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। तमाम युवा अपने कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणादायक होते हैं। आज के समय में अपनी लोक संस्कृति, अपनी बोलीभाषा के संरक्षण की ओर बहुत कम युवाओं का रुझान है। फिर भी तमाम युवा अपने क्षेत्र की पहचान बरकरार रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं। बागेश्वर जिले के कुरौली निवासी युवा भास्कर भौर्याल। भास्कर लोक गीत, लोक संस्कृति, लोकवाद्यों के साथ संरक्षण और संवर्धन में जुटे हैं। कुमाउनी भाषा के उत्थान में भी उनका बराबर योगदान रहता है। वह एक अच्छे चित्रकार भी हैं। दूरदर्शन से भी उनके कार्यक्रमों का प्रसारण हो चुका है। कई मंचों पर उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
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रीमा नाकुरी पट्टी के कुरोली निवासी 22 वर्षीय युवा भास्कर कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत और लोकवाद्यों को संजोने का काम कर रहे हैं। भास्कर की लोकगीत, झोड़ा, चांचरी, भगनौल, न्योली में अच्छी पकड़ है। उन्हें पहाड़ के परंपरागत वाद्य हुड़का और वीणा बजाने में महारत हासिल है। दूरदर्शन के डीडी उत्तराखंड चैनल पर भास्कर के काव्यपाठ और हुड़का, बिणई और अन्य लोकवाद्यों के साथ ही लोकगीतों का प्रसारण हो चुका है। भास्कर ने अपना यूट्यूब चैनल भास्कर भौर्याल जागता पहाड़ नाम से बनाया है। हालांकि भास्कर की यूट्यूब पर खास रुचि नहीं है। उनका मानना है कि लोक-संस्कृति, लोककलाओं को अपने विकास का जरिया न बनाकर लोक के विकास का जरिया बनाया जाए।
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भास्कर कहते हैं कि युवाओं को चाहिए कि वह अपने लोक को समझें, जानें। पहाड़ के गीतों में पुरखों का संघर्ष है। उनका प्यार, उनकी व्यथा और उनके खून पसीने की गंध आती है। भास्कर की प्राथमिक शिक्षा कंट्रीवाइड, जिम कार्बेट हल्द्वानी, हिमालया पब्लिक स्कूल चौकोड़ी, नवोदय विद्यालय गंगोलीहाट से हुई। भास्कर बताते हैं कि प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही लोक-संस्कृति के प्रति लगाव हुआ। अब भास्कर मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की पढ़ाई अल्मोड़ा से कर रहे हैं। भास्कर बताते हैं कि उन्होंने लोक विधाओं की कोई अलग से शिक्षा दीक्षा नहीं ली है बल्कि अपने आसपास अपने गांव, परिवार को देखकर ही वह इसको आगे ले जा रहे हैं।
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