बागेश्वर। कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में आयोजित सात दिनी मधुमक्खी पालन कार्यशाला संपन्न हो गई है। कार्यशाला में बागेश्वर, पौड़ी, नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के 25 मौन पालकों को वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन के गुर सिखाए गए। उन्हें शहद के अतिरिक्त मोम, जैली, रॉयल प्रोपोलिस आदि उत्पादों के माध्यम से आजीविका कमाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
सात दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि ऑचलिक निदेशालय लुधियाना के निदेशक डॉ. राजवीर सिंह ने ऑनलाइन जुड़कर मौन पालकों से वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खी पालन करने को कहा। समय-समय पर शोध संस्थानों और प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण कर नई तकनीक और जानकारी जुटाने की सलाह दी। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत ने पर्वतीय क्षेत्र में जैव विविधता के कारण परंपरागत रूप से उत्पादित शहद के औषधीय गुणों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. जेके बिष्ट ने मौनजालों में मधुमक्खी पालन के लाभ बताए। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. कमल कुमार पांडेय ने राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन मिशन के तहत मौन पालकों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कराए जा रहे हैं। विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने मधुमक्खियों में लगने वाले रोग और कीट प्रबंधन की जानकारी दी। कार्यक्रम सहायक निधि सिंह ने शहद निकालने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी बताई। क्षेत्र प्रबंधक एमपी सिंह ने मौन पालकों को राजकीय मौन पालन केंद्र ज्योलीकोट और पंतनगर विश्वविद्यालय का भ्रमण कराया। प्रशिक्षण में जानकी मेहता, गोविंद बल्लभ और बहादुर सिंह ने विशेष सहयोग दिया।