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Bageshwar News: द्वाराहाट के चंदन को बागेश्वर ने दिलाया मुकाम

Wed, 26 Apr 2023 09:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 26 Apr 2023 09:57 PM IST
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Bageshwar gave a place to Dwarahat's sandalwood
दून में बीते 13 अप्रैल को कैबिनेट मंत्री को उनके जन्मदिन पर केक खिलाते पुत्र गौरव दास। फाइल फोट
बागेश्वर। चंदन राम दास मूल रूप से द्वाराहाट के कांडे गांव निवासी थे। उन्होंने हल्द्वानी से छात्र जीवन में राजनीति की शुरूआत की थी लेकिन मुख्य रूप से बागेश्वर को अपनी कर्मस्थली बनाया। अपनी वाकपटुता, सौम्य व्यवहार और मृदु भाषा के बल पर उन्होंने जिलेवासियों के बीच गहरी पैठ बनाई। जिले के लोगों ने भी उनको भरपूर प्यार और समर्थन दिया जिसके चलते दास अपने जीवन काल में नगरपालिका अध्यक्ष से लेकर मंत्री पद तक की यात्रा करने में सफल रहे।
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वर्ष 1980 में दास ने बागेश्वर आकर राजनीति सफर आगे बढ़ाया। इससे पूर्व वह डिग्री कॉलेज हल्द्वानी के छात्रसंघ में संयुक्त सचिव रहे चुके थे। बागेश्वर आकर वह उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री मंत्री गोपाल राम दास के सानिध्य में रहकर राजनीतिक दांव-पेंच सीखने लगे। वर्ष 1997 में उन्होंने निर्दलीय नगरपालिका का चुनाव लड़ा और विजयी रहे। बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और वर्ष 2002 में कांग्रेस के टिकट पर दोबारा नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। हालांकि इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
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वर्ष 2006 में भाजपा के तत्कालीन कद्दावर नेता भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें भाजपा की सदस्यता ग्रहण कराई। भाजपा का सदस्य बनते ही दास के सितारे बुलंदी को छूने लगे। पार्टी सदस्य बनने के एक साल बाद ही उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट मिल गया जिसके बाद वह जिले की राजनीति का मजबूत स्तंभ बनकर उभरे।
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भरेपूरे परिवार में गुजरा बचपन
बागेश्वर। चंदन राम दास का जन्म द्वाराहाट (अल्मोड़ा) के कांडे गांव में 13 अप्रैल 1957 को रतन राम और पार्वती देवी के घर में हुआ था। रतन राम के सात बेटे और दो बेटियां थीं। चंदन पांचवें नंबर की संतान थे। उनके भाइयों में केसी राम, देवेंद्र लाल, हरी राम, चेत राम, ओमप्रकाश और बंशी लाल थे। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार तीन भाइयों का पूर्व में ही निधन हो गया था और एक भाई की कुछ समय पहले ही मृत्यु हुई थी। दास के जाने के बाद अब पांच भाई दुनिया छोड़ चुके हैं। दास अपरे पीछे पत्नी पार्वती दास, पुत्र गौरव दास व भाष्कर दास और पुत्रियां गुंजन दास, सुनयना दास, दामाद अक्षय चन्याल समेत सारे परिवार को बिलखता छोड़ गए हैं।
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