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Bageshwar: पालड़ीछीना में एक महीने बाद पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
Fri, 20 Feb 2026 09:00 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 20 Feb 2026 09:00 PM IST
सार
तेंदुए की सक्रियता के कारण ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर खासे चिंतित थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर वन विभाग ने एक महीने पूर्व क्षेत्र में पिंजरा लगाया था। आाज मादा तेंदुए को कैद करने में सफलता मिली।
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मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पालड़ीछीना क्षेत्र में पिछले लंबे समय से सक्रिय मादा तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई है। लगभग एक महीने की कड़ी मशक्कत और घेराबंदी के बाद मिली इस सफलता से क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी राहत महसूस की है। वन विभाग अब इस तेंदुए को सुरक्षित उसके प्राकृतिक वास में छोड़ने की तैयारी कर रहा है।
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पालड़ीछीना के विभिन्न गांवों में तेंदुए की सक्रियता के कारण ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर खासे चिंतित थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर वन विभाग ने एक महीने पूर्व क्षेत्र में पिंजरा लगाया था। सफलता न मिलते देख एक सप्ताह पहले पिंजरे का स्थान बदलकर चारधाम नामक स्थान पर रखा गया। बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गई। सूचना मिलते ही शुक्रवार सुबह मौके पर ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी रात के समय सतर्कता बरतें और अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
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पिंजरे में कैद हुई मादा तेंदुआ लगभग सात वर्ष की है। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों की टीम ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया है। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है। उसके दांत सुरक्षित हैं और शरीर पर किसी भी प्रकार के जख्म के निशान नहीं हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शुक्रवार रात को ही मादा तेंदुए को आबादी क्षेत्र से दूर उसके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
- केवलानंद पांडेय, रेंजर बागेश्वर