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...और दावे विकास के ः 40 किमी के लिए 200 रुपये किराया 

Sun, 29 Oct 2017 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर। Updated Sun, 29 Oct 2017 10:13 PM IST
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... and claim claims: Rs 200 for 40 km of development
जर्जर सड़क। - फोटो : amar ujala

पहाड़ पर विकास के दावे तो तमाम किए जाते हैं, पर पहाड़ के कुछ इलाकों के हालात आज भी वहां के लोगों के लिए कमोवेश वही हैं, जो राज्य गठन के बहुत पहले से थे। हालात यह हैं कि सिर्फ सड़क की बेहतर सुविधा और परिवहन के उचित संसाधन नहीं होने के कारण बाछम और बदियाकोट के 40 से 50 किमी के सफर के लिए आपको 200 रुपये किराये के लिए देने पड़ेंगे।

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जबकि इतने रुपये में आप बागेश्वर जिला मुख्यालय से अल्मोड़ा या हल्द्वानी पहुंच जाते हैं। यही नहीं मुख्य सड़क के बंद होने पर दूसरे रूट से यह किराया बढ़कर 500 रुपये तक हो जाता है। यहां को जाने वाली सड़क की हालत भी बेहद दयनीय है। इसके चलते मजबूरी में लोगों को जान हथेली पर रखकर आवागमन करना पड़ता है। 
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कपकोट विकासखंड के बाछम और बदियाकोट अति दुर्गम क्षेत्र में स्थित हैं। कपकोट तहसील मुख्यालय से बाछम की दूरी 40 किमी जबकि बदियाकोट की दूरी 52 किमी है। यहां के लिए जीपों का संचालन होता है, लेकिन इतनी दूरी तय करने के लिए ग्रामीणों को 200 से 250 रुपये किराया देना पड़ता है। इस मार्ग के बंद होने पर रेखाड़ी से तहसील मुख्यालय के लिए आवाजाही करनी पड़ती है।
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इस रूट से 65 किमी की यात्रा के 500 रुपये खर्च होते हैं। ग्रामीणों को किसी काम से तहसील आने के लिए केवल किराए के लिए ही एक हजार रुपये की जरूरत पड़ती है। गरीब ग्रामीण इतना किराया नहीं जुटा पाते हैं। प्रमाण पत्र, पेंशन या बीमार होने पर इलाज के लिए ग्रामीणों को कपकोट पहुंचना पड़ता है। ऐसे में सीमित आय वाले ग्रामीणों का अधिकांश रुपये किराए में ही खर्च हो जाता है। 


ग्राम प्रधान आनंद राम, उप प्रधान तारा सिंह, सरपंच रतन सिंह, शेर सिंह, जोहार सिंह, छात्र दिगंबर आदि ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है। महज 40 किमी की दूरी के 200 रुपये देना उनकी मजबूरी है। कम यात्री होने पर इससे भी अधिक किराया देना पड़ता है। सड़क की हालत बेहद खराब है। जगह-जगह पर मलबा पड़ा है। बारिश होते ही मलबा आने से सड़क बंद हो जाती है। शासन-प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। 

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