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राज्य का टॉपर बना विद्यालय रातिरकेटी राइंका
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:05 AM IST
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बागेश्वर। हिमालय की गोद में बसा जिले का रातिरकेटी राइंका हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाफल के प्रदर्शन के आधार पर राज्य का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना है। सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों की सूची में पौड़ी गढ़वाल का राकइंका दूसरे जबकि पौड़ी का ही श्रीनगर राकइंका तीसरे स्थान पर रहा है।
उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र 2017-18 के परीक्षाफल के आधार पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाले राज्य के तीन विद्यालयों का चयन किया गया है। इनमें बागेश्वर जिले का राजकीय इंटर कॉलेज रातिरकेटी सिरमौर बना है। विद्यालय को प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में 223.04 गुणांक मिले हैं। दूसरे स्थान पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज पैडुल, पौड़ी गढ़वाल को 205, तीसरे स्थान पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल को 184.25 गुणांक मिले हैं। 12 जुलाई को राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल प्रधानाचार्यों को पुरस्कृत करेंगे।
ये रहा विद्यालय का रिर्पोट कार्ड
रातिरकेटी राइंका में हाईस्कूल में 17 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से 12 ससम्मान पास हुए। जबकि पांच प्रथम श्रेणी में पास हुए। विद्यालय का हाईस्कूूल में प्रदर्शन 100 फीसदी रहा। इसी तरह इंटरमीडिएट में 45 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से एक ससम्मान पास हुआ। जबकि 33 प्रथम श्रेणी और 10 द्वितीय श्रेणी में पास हुए। इंटरमीडिएट का प्रदर्शन 97.77 फीसदी रहा।
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कई चुनौतियां पार कर पाई सफलता
बागेश्वर। जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर कपकोट ब्लॉक के अतिदुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित है रातिरकेटी राइंका। पांच ग्राम सभाओं रातिरकेटी, मल्खाडुगर्चा, हाम्टीकापड़ी, गोगिना, किमू की आबादी शिक्षा के लिए इस विद्यालय पर निर्भर है। प्रतिकूल भौगोलिक हालातों के बीच आजीविका, शिक्षा आदि विभिन्न कारणों से बड़ी आबादी पलायन कर चुकी है। विद्यालय में केवल निर्धन छात्र ही बचे हैं।
प्रधानाचार्य बसंत कुमार त्रिपाठी कहते हैं, पिछले शैक्षिक सत्र में बोर्ड के 62 बच्चों के साथ जितनी उम्मीदें थी, उससे कहीं ज्यादा चुनौतियां खड़ी थी। विद्यालय में कंप्यूटर, इंटरनेट आदि संसाधन तो दूर बच्चों के लिए बैठने के लिए अदद फर्नीचर तक नहीं था। बेहतर तैयारी में शिक्षकों की कमी आड़े आ रही थी। जागरूक अभिभावकों ने अपने खर्च पर विज्ञान के दो शिक्षक रखे। अभिभावकों के दबाव में प्रशासन ने दो और शिक्षकों की व्यवस्था की। इससे पढ़ाई पटरी पर आई। बेहतर तैयारी के लिए सायंकालीन कक्षाएं चलाई। आखिरकार सामूहिक प्रयास रंग लाया।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है। इससे विद्यालय और जिले का सिर फख्र से ऊंचा हुआ है। उम्मीद है कि इससे जिले के अन्य विद्यालय, प्रधानाचार्य भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे।
- हरीश चंद्र सिंह, सीईओ, बागेश्वर
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उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र 2017-18 के परीक्षाफल के आधार पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाले राज्य के तीन विद्यालयों का चयन किया गया है। इनमें बागेश्वर जिले का राजकीय इंटर कॉलेज रातिरकेटी सिरमौर बना है। विद्यालय को प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में 223.04 गुणांक मिले हैं। दूसरे स्थान पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज पैडुल, पौड़ी गढ़वाल को 205, तीसरे स्थान पर राजकीय कन्या इंटर कॉलेज श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल को 184.25 गुणांक मिले हैं। 12 जुलाई को राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल प्रधानाचार्यों को पुरस्कृत करेंगे।
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ये रहा विद्यालय का रिर्पोट कार्ड
रातिरकेटी राइंका में हाईस्कूल में 17 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से 12 ससम्मान पास हुए। जबकि पांच प्रथम श्रेणी में पास हुए। विद्यालय का हाईस्कूूल में प्रदर्शन 100 फीसदी रहा। इसी तरह इंटरमीडिएट में 45 छात्र पंजीकृत थे। इनमें से एक ससम्मान पास हुआ। जबकि 33 प्रथम श्रेणी और 10 द्वितीय श्रेणी में पास हुए। इंटरमीडिएट का प्रदर्शन 97.77 फीसदी रहा।
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कई चुनौतियां पार कर पाई सफलता
बागेश्वर। जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर कपकोट ब्लॉक के अतिदुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित है रातिरकेटी राइंका। पांच ग्राम सभाओं रातिरकेटी, मल्खाडुगर्चा, हाम्टीकापड़ी, गोगिना, किमू की आबादी शिक्षा के लिए इस विद्यालय पर निर्भर है। प्रतिकूल भौगोलिक हालातों के बीच आजीविका, शिक्षा आदि विभिन्न कारणों से बड़ी आबादी पलायन कर चुकी है। विद्यालय में केवल निर्धन छात्र ही बचे हैं।
प्रधानाचार्य बसंत कुमार त्रिपाठी कहते हैं, पिछले शैक्षिक सत्र में बोर्ड के 62 बच्चों के साथ जितनी उम्मीदें थी, उससे कहीं ज्यादा चुनौतियां खड़ी थी। विद्यालय में कंप्यूटर, इंटरनेट आदि संसाधन तो दूर बच्चों के लिए बैठने के लिए अदद फर्नीचर तक नहीं था। बेहतर तैयारी में शिक्षकों की कमी आड़े आ रही थी। जागरूक अभिभावकों ने अपने खर्च पर विज्ञान के दो शिक्षक रखे। अभिभावकों के दबाव में प्रशासन ने दो और शिक्षकों की व्यवस्था की। इससे पढ़ाई पटरी पर आई। बेहतर तैयारी के लिए सायंकालीन कक्षाएं चलाई। आखिरकार सामूहिक प्रयास रंग लाया।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है। इससे विद्यालय और जिले का सिर फख्र से ऊंचा हुआ है। उम्मीद है कि इससे जिले के अन्य विद्यालय, प्रधानाचार्य भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे।
- हरीश चंद्र सिंह, सीईओ, बागेश्वर