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जलागम कार्यों में भारी अनियमितता और फर्जीवाड़ा!
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:05 AM IST
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बागेश्वर। जलागम के कार्यों में भारी अनियमितता और फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि जलागम के काम धरातल पर न होकर कागजों पर ही चल रहे हैं। परियोजना अधिकारी और ग्रामीण जन प्रतिनिधि लाखों के बजट की बंदरबांट कर रहे हैं। नतीजतन जलागम लूटखसोट और कमीशनबाजी का अड्डा बनकर रह गया है। जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह दानू ने जलागम पर भ्रष्टाचार के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने डीएम से जलागम के कार्यों में अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है।
बृहस्पतिवार को जिपं सदस्य ने डीएम से इस आशय की शिकायत की। उन्होंने बताया कि चयनित क्षेत्रों में डीपीआर के मुताबिक काम नहीं हो रहे हैं। धरातल के बजाय कागजों में ही प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर दिखाए जा रहे हैं। इन फर्जी हस्ताक्षरों से भुगतान तक निकाला जा रहा है। उन्होंने निर्बल वर्ग की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कहा कि खुली बैठकों में चयन के बजाय कमीशन लेकर लाभार्थी का चयन हो रहा है। निर्माण में गुणवत्ता ताख पर रख दी गई है। उन्होंने जलागम कार्यों की वित्तीय, भौतिक जांच की मांग उठाई।
जलागम के कार्यों पर उठे सवाल
= डीपीआर के मुताबिक नहीं हो रहा काम
= बंद कमरे में बैठकर बनाई लाभार्थियों की सूची
= कागजों में ही चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम
= ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षरों से लाखों गोलमाल
= खुले बाजार में बेची जा रही जलागम की सामग्री
= निर्बल वर्ग के लाभार्थियों से वसूला जा रहा कमीशन
= बिल वाउचरों में बरती जा रही गंभीर अनियमितता
परियोजना अधिकारी का किया घेराव
जलागम में भ्रष्टाचार को लेकर जिपं सदस्य और ग्रामीणों ने परियोजना अधिकारी का घेराव किया। उन्होंने परियोजना के कामकाज को लेकर सवाल उठाए और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का एलान किया। वहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दीपक घस्याल, भूपेंद्र दानू, गोकुल दानू, संजय कोरंगा, नरेंद्र कोरंगा आदि थे।
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कपकोट, गोगिना, लोहारखेत में चल रहा काम
जिले में जलागम के तहत कपकोट, गोगिना और लोहारखेत में काम चल रहा है। इन चयनित क्षेत्रों में जलागम के कार्यों के लिए डीपीआर तैयार की गई है। इसके तहत रीटेनिंग वॉल, चैकडैम, केटवायर, हार्वेस्टिंग टैंक, गूल, पुलिया निर्माण आदि कार्य होने हैं। योजना के तहत ग्रामीणों को प्रशिक्षण के साथ ही इन योजनाओं का लाभ दिया जाना है।
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बृहस्पतिवार को जिपं सदस्य ने डीएम से इस आशय की शिकायत की। उन्होंने बताया कि चयनित क्षेत्रों में डीपीआर के मुताबिक काम नहीं हो रहे हैं। धरातल के बजाय कागजों में ही प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर दिखाए जा रहे हैं। इन फर्जी हस्ताक्षरों से भुगतान तक निकाला जा रहा है। उन्होंने निर्बल वर्ग की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कहा कि खुली बैठकों में चयन के बजाय कमीशन लेकर लाभार्थी का चयन हो रहा है। निर्माण में गुणवत्ता ताख पर रख दी गई है। उन्होंने जलागम कार्यों की वित्तीय, भौतिक जांच की मांग उठाई।
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जलागम के कार्यों पर उठे सवाल
= डीपीआर के मुताबिक नहीं हो रहा काम
= बंद कमरे में बैठकर बनाई लाभार्थियों की सूची
= कागजों में ही चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम
= ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षरों से लाखों गोलमाल
= खुले बाजार में बेची जा रही जलागम की सामग्री
= निर्बल वर्ग के लाभार्थियों से वसूला जा रहा कमीशन
= बिल वाउचरों में बरती जा रही गंभीर अनियमितता
परियोजना अधिकारी का किया घेराव
जलागम में भ्रष्टाचार को लेकर जिपं सदस्य और ग्रामीणों ने परियोजना अधिकारी का घेराव किया। उन्होंने परियोजना के कामकाज को लेकर सवाल उठाए और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का एलान किया। वहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दीपक घस्याल, भूपेंद्र दानू, गोकुल दानू, संजय कोरंगा, नरेंद्र कोरंगा आदि थे।
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कपकोट, गोगिना, लोहारखेत में चल रहा काम
जिले में जलागम के तहत कपकोट, गोगिना और लोहारखेत में काम चल रहा है। इन चयनित क्षेत्रों में जलागम के कार्यों के लिए डीपीआर तैयार की गई है। इसके तहत रीटेनिंग वॉल, चैकडैम, केटवायर, हार्वेस्टिंग टैंक, गूल, पुलिया निर्माण आदि कार्य होने हैं। योजना के तहत ग्रामीणों को प्रशिक्षण के साथ ही इन योजनाओं का लाभ दिया जाना है।