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शिक्षण में आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया
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कपकोट (बागेश्वर)। शिक्षा विभाग और कैवल्या एजुकेशनल फाउंडेशन की ओर से गणित विषय को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में शिक्षकों को गणित के शिक्षण में रोज आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। कार्यशाला का शुुुुभारंभ उप शिक्षा अधिकारी रमेश मौर्य, फाउंडेशन के फेसिलेटर अनिल गुप्ता, प्रोग्राम मैनेजर राजेंद्र मसीह ने दीप जलाकर किया।
ब्लाक सभागार में आयोजित कार्यशाला की शुरूआत कैवल्या एजुकेशन फाउंडेशन के सदस्यों ने एक नाटक प्रस्तुत कर किया। नाटक के जरिये गणित के शिक्षण में रोज आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। स्वेता और स्निग्धा ने चेतना ने गीत प्रस्तुत किया। उप शिक्षा अधिकारी मौर्य ने एनसीइआरटी की पुस्तकों के बारे में बताया किस प्रकार से एनसीइआरटी की पुस्तकें बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। प्रशिक्षक अनिल गुप्ता ने कार्यशाला के पहले सत्र में गणित के शिक्षण में आने वाली चुुनौतियों के बारे में सामूहिक चर्चा की। दूसरे सत्र में शिक्षकों ने समूह बनाकर गणित के प्रश्न हल करने के नए तरीके खोजे और प्रस्तुति दी। अंतिम और तीसरे सत्र में एनसीआरटी की पुस्तकेें गतिविधियों पर पूर्ण रूप से आधारित हैं, सीखने और सिखाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इस मौके पर कैवल्या एजुुकेशन फाउंडेशन के मौ. हसन रजा, तारा कांडपाल, सुधीर सती, आंचल गिरी, अंजलि पांडे, हरीश सिंह, प्रवीण कपकोटी और राम सिंह थे।
ब्लाक सभागार में आयोजित कार्यशाला की शुरूआत कैवल्या एजुकेशन फाउंडेशन के सदस्यों ने एक नाटक प्रस्तुत कर किया। नाटक के जरिये गणित के शिक्षण में रोज आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। स्वेता और स्निग्धा ने चेतना ने गीत प्रस्तुत किया। उप शिक्षा अधिकारी मौर्य ने एनसीइआरटी की पुस्तकों के बारे में बताया किस प्रकार से एनसीइआरटी की पुस्तकें बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। प्रशिक्षक अनिल गुप्ता ने कार्यशाला के पहले सत्र में गणित के शिक्षण में आने वाली चुुनौतियों के बारे में सामूहिक चर्चा की। दूसरे सत्र में शिक्षकों ने समूह बनाकर गणित के प्रश्न हल करने के नए तरीके खोजे और प्रस्तुति दी। अंतिम और तीसरे सत्र में एनसीआरटी की पुस्तकेें गतिविधियों पर पूर्ण रूप से आधारित हैं, सीखने और सिखाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इस मौके पर कैवल्या एजुुकेशन फाउंडेशन के मौ. हसन रजा, तारा कांडपाल, सुधीर सती, आंचल गिरी, अंजलि पांडे, हरीश सिंह, प्रवीण कपकोटी और राम सिंह थे।
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