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पैसिया की पीड़ा: पेड़ों पर लगे फल...पीने के लिए भरपूर जल, सड़क होती तो गांव खाली न होते; घर छोड़ गए 30 परिवार

Thu, 06 Mar 2025 03:14 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 06 Mar 2025 03:14 PM IST
सार

बागेश्वर के पैसिया गांव में सुविधाएं नहीं होने से 30 परिवार घर छोड़ गए हैं। सड़क के अभाव और जंगली जानवरों के आतंक से खेत बंजर हो रहे है।

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30 families left their homes due to lack of facilities in Paisiya village bageshwar
पैसिया गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागेश्वर जिले के पैसिया गांव की कहानी उत्तराखंड के कई गांवों से जुदा नहीं है। बेशक, यहां फल और पानी की कमी नहीं है। पानी इतना है कि यहां से चार गांवों के लिए आपूर्ति की जाती है। माल्टा, नींबू, संतरा और अखरोट की भी यहां खूब पैदावार होती है। बस एक सड़क के यहां नहीं पहुंचने से गांव खाली होता चला गया। पिछले डेढ़ दशक में आधा गांव खाली हो गया है। पढ़िए संवाद न्यूज एजेंसी के कमल कांडपाल की रिपोर्ट...

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बांज और बुरांश के जंगलों के बीच बसा है क्षेत्र
बांज और बुरांश के घने जंगलों से घिरे इस गांव में प्राकृि सौंदर्य और संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांव के लिए सड़क न बनने से यहां से पलायन जारी है। 15 साल पहले तक यहां 60 परिवार थे, जो अब 30 रह गए हैं। जो हैं, वे जंगली जानवरों से परेशान होकर बंजर होते खेतों के बीच जीवनयापन करने के लिए मजबूर हैं।
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पैदल चलना पड़ता है तीन किमी
पैसिया गांव जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर है। ग्रामीणों को नजदीकी सड़क से तीन किमी पैदल चलना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए 20 किमी दूर कांडा सीएचसी या 40 किमी दूर जिला अस्पताल बागेश्वर आना पड़ता है। गर्भवतियों और मरीजों को अब भी डोली पर लाया या ले जाया जाता है।

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75 फीसदी जमीन हुई उजाड़
गांव में धान, गेहूं, दलहन, नींबू, माल्टा, संतरा और अखरोट की खूब पैदावार होती थी। ग्रामीण मौसमी सब्जियों की खेती, दूध, दही, घी और मौसमी फल बेचकर आजीविका चलाते थे। अब खेती करने वाले हैं नहीं, जिससे खेत बंजर हो गए हैं। जो लोग खेती कर रहे हैं, उसे जंगली जानवर उजाड़ दे रहे हैं। इसके चलते 75% खेत बंजर हो चुके हैं।

स्कूल में सात बच्चे, युवाओं का रुख शहरों की ओर
पलायन का सबसे बुरा असर गांव के स्कूल पर पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय में अब सिर्फ सात बच्चे पढ़ते हैं, जो एकल शिक्षक के भरोसे हैं। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पांच किमी दूर खुनौली जाना पड़ता है। गांव के युवा रोजगार की तलाश में मैदानी इलाकों का रुख कर रहे हैं।


अधिकारियों की बात
पैसिया गांव में पलायन रोकथाम योजना के तहत कृषि, बागवानी और मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। लोनिवि को सड़क निर्माण के लिए कदम उठाने के लिए कहा जाएगा। - आरसी तिवारी, सीडीओ बागेश्वर
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