{"_id":"5be87b3cbdec22693257c163","slug":"121541962556-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशत के साए में गुजरी बागेश्वर वासियों की रात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशत के साए में गुजरी बागेश्वर वासियों की रात
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। नुमाइशखेत और चौरासी के ग्रामीणों की शनिवार की रात दहशत के साए में गुजरी। ग्रामीणों ने बर्तन बजाकर, आतिशबाजी कर तेंदुए को भगाया।
तेंदुए की दहाड़ ने शनिवार की रात नुमाइशखेत सहित आस-पास के लोगों को परेशान किए रखा। सायं छह बजे ही तेंदुआ नुमाइशखेेत के समीप देखा गया। बाद में शहर के अन्य स्थानों में भी तेंदुए की धमक से शहर के लोग दहशत में हैं। चौक बाजार में भी तेंदुआ सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ। वन विभाग की टीम भी डीएफओ आरके सिंह के नेतृत्व में रात भर गश्त करते हुए तेंदुए को भगाने का कार्य करती रही। लोगों ने आदमखोर हो चुके तेंदुए को गोली मारने की मांग की है।
तेंदुए के आतंक से दो की मौत के बाद मैं घर से बाहर नहीं निकल पा रहा हूं। खेलने कूदने, ट्यूशन, स्कूल जाने में भी डर लग रहा है। अब तो दिन में ही तेंदुआ दिख रहा है।
- निशांत, कक्षा 10
तेंदुए के आतंक से मैं स्कूल नहीं जा रहा हूं जिस कारण मेरी पढ़ाई बाधित हो रही है। वन विभाग से अपील है कि वह इस आतंक से निजात दिलाए।
- सुमित, कक्षा 10
- दहशत के कारण मेरे माता, पिता मुझे स्कूल छोड़ने, लेने आ रहे हैं। घर पहुंचने के बाद मैं घर में कैद रहता हूं। फिक्र से घरवाले खेलने नहीं जाने देते।
- नीरज, कक्षा 10
विज्ञापन
तेंदुए की दहाड़ ने शनिवार की रात नुमाइशखेत सहित आस-पास के लोगों को परेशान किए रखा। सायं छह बजे ही तेंदुआ नुमाइशखेेत के समीप देखा गया। बाद में शहर के अन्य स्थानों में भी तेंदुए की धमक से शहर के लोग दहशत में हैं। चौक बाजार में भी तेंदुआ सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ। वन विभाग की टीम भी डीएफओ आरके सिंह के नेतृत्व में रात भर गश्त करते हुए तेंदुए को भगाने का कार्य करती रही। लोगों ने आदमखोर हो चुके तेंदुए को गोली मारने की मांग की है।
तेंदुए के आतंक से दो की मौत के बाद मैं घर से बाहर नहीं निकल पा रहा हूं। खेलने कूदने, ट्यूशन, स्कूल जाने में भी डर लग रहा है। अब तो दिन में ही तेंदुआ दिख रहा है।
विज्ञापन
- निशांत, कक्षा 10
तेंदुए के आतंक से मैं स्कूल नहीं जा रहा हूं जिस कारण मेरी पढ़ाई बाधित हो रही है। वन विभाग से अपील है कि वह इस आतंक से निजात दिलाए।
- सुमित, कक्षा 10
- दहशत के कारण मेरे माता, पिता मुझे स्कूल छोड़ने, लेने आ रहे हैं। घर पहुंचने के बाद मैं घर में कैद रहता हूं। फिक्र से घरवाले खेलने नहीं जाने देते।
- नीरज, कक्षा 10