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बजट के अभाव में लटकी हिल पेट्रोल यूनिट की योजना
Updated Tue, 26 Jun 2018 11:56 PM IST
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बागेश्वर। शासन ने हिल पेट्रोल यूनिट (एचपीयू) की योजना तो बनाई, लेकिन बजट देने से हाथ खड़े कर दिए। नतीजतन अल्मोड़ा को छोड़कर कुमाऊं के अन्य पर्वतीय जिलों में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए प्रस्तावित एचपीयू की योजना साकार नहीं हो सकी है।
इस वर्ष चंपावत के स्वाला में भीषण सड़क हादसे के बाद शासन ने एचपीयू की योजना बनाई थी। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में सीपीयू की तर्ज पर बिागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ जिलों में एचपीयू का गठन किया जाना था। इस योजना का मकसद पर्वतीय जिलों में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के साथ ही दुर्घटना के बाद त्वरित राहत और बचाव करना था लेकिन बजट के अभाव में यहां एचपीयू का गठन अभी तक नहीं हो सका है। अलबत्ता अल्मोड़ा में निजी क्षेत्र के सहयोग से मिले वाहन आदि संसाधनों से एचपीयू का संचालन किया जा रहा है। पिथौरागढ़ में सीपीयू तो है, लेकिन एचपीयू के उद्देश्यों से कोसों दूर है। इन पर्वतीय जिलों के खतरनाक सड़क मार्गों पर वाहन दुर्घटनाओं की आशंका बदस्तूर बनी है।
शासन ने पुलिस के पाले में सरकाई गेंद
बजट का बंदोबस्त न होने के बाद शासन ने पुलिस के पाले में गेंद सरका दी है। पुलिस से योजना के लिए अपने स्तर पर फंड जुटाने को कहा गया है। आईजीपी कुमाऊं पीएस रावत मंडल के दौरे पर जिला पुलिस प्रमुखों को सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत प्रायोजक जुटाने को कह चुके हैं। अल्मोड़ा में तो एचपीयू के लिए प्रायोजक मिल गए लेकिन अन्य जिलों में पुलिस को प्रायोजक नहीं मिल पा रहे हैं।
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पुलिस ने जनप्रतिनिधियों पर लगाई टकटकी
एचपीयू के गठन के लिए बागेश्वर जिला पुलिस जनप्रतिनिधियों की ओर टकटकी लगाए है। इस योजना को साकार करने के लिए पुलिस जनप्रतिनिधियों से मदद मांगेगी। जनप्रतिनिधियों से सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत बजट और संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की जाएगी।
बजट का अभाव एचपीयू गठन के आड़े आ रहा है। बल के गठन के लिए जनप्रतिनिधियों से संपर्क साध रहे हैं। बजट का बंदोबस्त होने या फिर प्रायोजक मिलने के बाद ही एचपीयू का गठन हो सकता है।
- मुकेश चौहान, एसपी, बागेश्वर
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इस वर्ष चंपावत के स्वाला में भीषण सड़क हादसे के बाद शासन ने एचपीयू की योजना बनाई थी। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में सीपीयू की तर्ज पर बिागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ जिलों में एचपीयू का गठन किया जाना था। इस योजना का मकसद पर्वतीय जिलों में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के साथ ही दुर्घटना के बाद त्वरित राहत और बचाव करना था लेकिन बजट के अभाव में यहां एचपीयू का गठन अभी तक नहीं हो सका है। अलबत्ता अल्मोड़ा में निजी क्षेत्र के सहयोग से मिले वाहन आदि संसाधनों से एचपीयू का संचालन किया जा रहा है। पिथौरागढ़ में सीपीयू तो है, लेकिन एचपीयू के उद्देश्यों से कोसों दूर है। इन पर्वतीय जिलों के खतरनाक सड़क मार्गों पर वाहन दुर्घटनाओं की आशंका बदस्तूर बनी है।
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शासन ने पुलिस के पाले में सरकाई गेंद
बजट का बंदोबस्त न होने के बाद शासन ने पुलिस के पाले में गेंद सरका दी है। पुलिस से योजना के लिए अपने स्तर पर फंड जुटाने को कहा गया है। आईजीपी कुमाऊं पीएस रावत मंडल के दौरे पर जिला पुलिस प्रमुखों को सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत प्रायोजक जुटाने को कह चुके हैं। अल्मोड़ा में तो एचपीयू के लिए प्रायोजक मिल गए लेकिन अन्य जिलों में पुलिस को प्रायोजक नहीं मिल पा रहे हैं।
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पुलिस ने जनप्रतिनिधियों पर लगाई टकटकी
एचपीयू के गठन के लिए बागेश्वर जिला पुलिस जनप्रतिनिधियों की ओर टकटकी लगाए है। इस योजना को साकार करने के लिए पुलिस जनप्रतिनिधियों से मदद मांगेगी। जनप्रतिनिधियों से सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत बजट और संसाधन उपलब्ध कराने की अपील की जाएगी।
बजट का अभाव एचपीयू गठन के आड़े आ रहा है। बल के गठन के लिए जनप्रतिनिधियों से संपर्क साध रहे हैं। बजट का बंदोबस्त होने या फिर प्रायोजक मिलने के बाद ही एचपीयू का गठन हो सकता है।
- मुकेश चौहान, एसपी, बागेश्वर