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जिले में 12,930 परिवार के पास नहीं है शौचालय
गणेश उपाध्याय/बागेश्वर
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:08 PM IST
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देश में चल रहे भारत स्वच्छ अभियान को यहां जल्दी सफलता मिलने के आसार नहीं लग रहे हैं। जिले में अब भी 12,930 लोगों के पास शौचालय नहीं है। शौचालय नहीं होने से कई लोग नदियों और गधेरों के किनारे खुले में शौच को विवश हैं। इससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, भूमिहीनों के लिए शौचालय कब तक बनेंगे, इसका भी फिलहाल किसी के भी पास ठोस जवाब नहीं है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी ढाई लाख से अधिक पहुंच गई है। जिले में कुल 336 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों में कुल 59,852 घर हैं। नगर पालिका बागेश्वर में कुल 2200 जबकि नगर पंचायत कपकोट में एक हजार से अधिक घर हैं। स्वजल परियोजना के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में बागेश्वर ब्लाक में 19,825 शौचालय वाले घर, कपकोट ब्लाक में 11,418 जबकि गरुड़ ब्लाक में 12,805 शौचालय वाले घर हो गए थे। परियोजना प्रबंधक गणेश चंद्र पांडे ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2014 में बागेश्वर ब्लाक में 5507 घरों में शौचालय नहीं थे। इसमें से अब तक 1607 घरों में शौचालयों का निर्माण हो चुका है, जबकि वहां 3900 घरों में शौचालयों का निर्माण होना शेष है। कपकोट ब्लाक में 6289 घरों में शौचालय नहीं थे। इनमें से 1457 शौचालयों का निर्माण हो चुुुका है, जबकि 2974 शौचालयों का निर्माण होना शेष है। इसी तरह गरुड़ ब्लाक में 4048 घरों में शौचालय नहीं थे, वहां अब तक 1204 घरों में शौचालय बन चुके हैं। शेष 4832 घरों में शौचालय बनने हैं। दो साल के भीतर हर घर में शौचालय बनाने का लक्ष्य है। शौचालयों के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्र में लाभार्थी को 12 हजार रुपये दिया जाता है। भुगतान चेक के जरिये होता है।
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इधर, नगर पालिका बागेश्वर के ईओ ईश्वर सिंह रावत ने बताया कि बागेश्वर में 606 लोगों के पास अस्थायी शौचालय हैं। कपकोट नगर पंचायत क्षेत्र में 494 लोगों के पास अस्थायी शौचालय हैं। वहीं नगर क्षेत्र बागेश्वर में 124 भूमिहीनों के पास शौचालय नहीं हैं। शहरी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लिए लाभार्थी को आठ हजार रुपये देय है। इसमें से अब तक 53 लोगों को शौचालय निर्माण के लिए दो-दो हजार के चेक दे दिए हैं, जबकि अवशेष पैसा शौचालय बनने के बाद ही लाभार्थी को दिया जाएगा। कपकोट के ईओ हरचिरण सिंह ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 294 शौचालय बनाने का लक्ष्य है। एक शौचालय के निर्माण के लिए लाभार्थी को आठ हजार रुपये देय है। इसमें से 27 लाभार्थियों को दो-दो हजार के चेक दे दिए हैं। शेष निर्माण पूरा होने पर ही मिलेेगा।
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एक हजार से अधिक लाभार्थियों को नहीं मिला भुगतान
वर्ष 2014 से अब तक एक हजार से अधिक लाभार्थियों को शौचालयों के निर्माण का भुगतान नहीं हो सका है। स्वजल के परियोजना प्रबंधक गणेश चंद्र पांडे ने बताया कि एससीएसटी के लाभार्थियों का भुगतान हो चुुका है। सामान्य बीपीएल लाभार्थियों का भुगतान होना शेष है। केंद्र से बजट मिलते ही भुगतान की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
भूमिहीनों के लिए है बड़ी समस्या
नगर समेत जिले में चार सौ से अधिक लोग भूमिहीन हैं। भूमिहीनों के पास शौचालय नहीं होने के कारण वह नदियों और गधेरों के किनारे खुले में शौच को मजबूर हैं। इस कारण भारत स्वच्छ अभियान को जहां धक्का लग रहा है, वहीं जल प्रदूषण भी बढ़ती जा रहा है। नगर पालिका परिषद के ईओ ईश्वर सिंह रावत ने कहा कि भूमिहीनों के शौचालय बनाने के लिए पालिका खाली जमीन तलाश रही है। भूमि उपलब्ध होने पर उनके लिए शौचालय बनवाने के प्रयास किए जाएंगे।