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शिवार्चन के लिए तैयार भगवान बागनाथ का द्वार
Updated Sun, 15 Jul 2018 11:53 PM IST
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बागेश्वर। सरयू-गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम पर बसा भगवान बागनाथ का मंदिर स्थानीय ही नहीं वरन देश-विदेश के अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातत्व महत्व का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। धार्मिक दृष्टिकोण से इसे उत्तर की काशी का दर्जा मिला है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती निवास करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव के गण चंडीश ने बागेश्वर नगरी बसाई थी। साथ ही यहां शिव मंदिर भी स्थापित किया। भगवान शिव के व्याघ्र रूप में अवतरित होने के चलते इसे व्याघ्रेश्वर कहा जाता था। जो कालांतर में बागेश्वर हो गया। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से वर्ष 1602 में चंद राजा लक्ष्मी चंद ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर भव्य स्वरूप दिया।
प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर में सातवीं सदी लेकर 16 सदी तक अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। बागनाथ मंदिर में वर्ष भर देसी विदेशी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। सावन मास में यहां शिवार्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बकौल पुजारी हेम चंद्र जोशी सच्चे मन और विधि विधान से अर्चना करने वालों की मनोकामना भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं।
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सावन के लिए सजा मंदिर
बागेश्वर। सोमवार से सावन मास शुरू हो रहा है। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय सावन मास को देखते हुए मंदिर को सजाया और संवारा गया है। सावन माह के हर सोमवार को यहां विशेष शिवार्चन का कार्यक्रम होगा। सावन के पहले सोमवार को मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। मंदिर समिति ने आयोजन की तैयारी पूरी कर ली हैं।
इन मंदिरों में जुटेंगे श्रद्धालु
बागनाथ मंदिर, बैजनाथ मंदिर, गोपेश्वर महादेव, नीलेश्वर मंदिर।
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पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव के गण चंडीश ने बागेश्वर नगरी बसाई थी। साथ ही यहां शिव मंदिर भी स्थापित किया। भगवान शिव के व्याघ्र रूप में अवतरित होने के चलते इसे व्याघ्रेश्वर कहा जाता था। जो कालांतर में बागेश्वर हो गया। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से वर्ष 1602 में चंद राजा लक्ष्मी चंद ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर भव्य स्वरूप दिया।
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प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर में सातवीं सदी लेकर 16 सदी तक अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। बागनाथ मंदिर में वर्ष भर देसी विदेशी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। सावन मास में यहां शिवार्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बकौल पुजारी हेम चंद्र जोशी सच्चे मन और विधि विधान से अर्चना करने वालों की मनोकामना भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं।
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सावन के लिए सजा मंदिर
बागेश्वर। सोमवार से सावन मास शुरू हो रहा है। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय सावन मास को देखते हुए मंदिर को सजाया और संवारा गया है। सावन माह के हर सोमवार को यहां विशेष शिवार्चन का कार्यक्रम होगा। सावन के पहले सोमवार को मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। मंदिर समिति ने आयोजन की तैयारी पूरी कर ली हैं।
इन मंदिरों में जुटेंगे श्रद्धालु
बागनाथ मंदिर, बैजनाथ मंदिर, गोपेश्वर महादेव, नीलेश्वर मंदिर।