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मुंबई के 11 साल के सूरज ने भी पूरा किया सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रैक
Sat, 25 May 2019 11:52 PM IST
दीपक नेगी
बागेश्वर।
बागेश्वर।
Published by: दीपक नेगी
Updated Sat, 25 May 2019 11:52 PM IST
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नन्हा ट्रैकर सूरज
- फोटो : अमर उजाला
्सुंरदरढूंगा ग्लेशियर ट्रैक को मुंबई का 11 साल का नन्हा ट्रैकर भी पूरा कर लौट आया है। अब उसकी इच्छा दोबारा जीरो प्वाइंट तक जाने की है।
मुंबई का 13 सदस्यीय दल 18 मई को पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। दल में चार महिला और नौ पुरुष थे। दल एक हफ्ते बाद शनिवार को बागेश्वर लौट आया है। दल ने सात दिन के ट्रैक में खर्किया, ज्योतिली देवी कुंड और सुंदरढूंगा ग्लेशियर तक पहुंचा। दल ने अमर उजाला से अनुभव साझा करते हुए बताया कि ट्रैकिंग मार्ग पर चारों तरफ हरियाली है।
दल में 11 साल का नन्हा ट्रैकर सूरज भी था। सूरज ने बताया कि चारो तरफ इतनी सुंदरता थी कि कहीं भी लगा ही नहीं कि थकान हो रही है। दल का कहना है कि यहां के लोग भी देवतुल्य हैं। यदि दल का कोई सदस्य ट्रैक से अलग हो जाता है या पीछे छूट जाता तब ग्रामीण इसको लेकर ट्रैक तक पहुंचाने में मदद करते। खाने, ठहरने की व्यवस्था भी करते हैं।
नदी में पत्थरों के पुल से जागा रोमांच
दल के मुताबिक ट्रैकिंग के दौरान एक नदी में पुल नहीं था। इस पर सदस्यों को लगा कि अब जाना मुश्किल हो पाएगा। साथ में चल रहे पोर्टरों ने बड़े-बड़े पत्थरों से एक पुल बना दिया।
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मुंबई का 13 सदस्यीय दल 18 मई को पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। दल में चार महिला और नौ पुरुष थे। दल एक हफ्ते बाद शनिवार को बागेश्वर लौट आया है। दल ने सात दिन के ट्रैक में खर्किया, ज्योतिली देवी कुंड और सुंदरढूंगा ग्लेशियर तक पहुंचा। दल ने अमर उजाला से अनुभव साझा करते हुए बताया कि ट्रैकिंग मार्ग पर चारों तरफ हरियाली है।
दल में 11 साल का नन्हा ट्रैकर सूरज भी था। सूरज ने बताया कि चारो तरफ इतनी सुंदरता थी कि कहीं भी लगा ही नहीं कि थकान हो रही है। दल का कहना है कि यहां के लोग भी देवतुल्य हैं। यदि दल का कोई सदस्य ट्रैक से अलग हो जाता है या पीछे छूट जाता तब ग्रामीण इसको लेकर ट्रैक तक पहुंचाने में मदद करते। खाने, ठहरने की व्यवस्था भी करते हैं।
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नदी में पत्थरों के पुल से जागा रोमांच
दल के मुताबिक ट्रैकिंग के दौरान एक नदी में पुल नहीं था। इस पर सदस्यों को लगा कि अब जाना मुश्किल हो पाएगा। साथ में चल रहे पोर्टरों ने बड़े-बड़े पत्थरों से एक पुल बना दिया।
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