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तबाह गांवों में मदद कर रहीं बछेंद्री पाल
उत्तरकाशी/ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2013 11:44 AM IST
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कभी उत्तरकाशी के नाकुरी गांव की बेटी बछेंद्रीपाल ने ‘सागरमाथा’ एवरेस्ट को चूमकर दुनिया भर में अपनी और भारतीय महिलाओं की धाक जमाई थी। अब वह और उनकी पर्वतारोही महिला ब्रिगेड एवरेस्ट से भी ‘दुष्कर’ चोटियां चूम रही है।
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टीम अपने पर्वतारोहण के कौशल का उपयोग ऐसे इलाकों में आपदा पीड़ितों की मदद करने में कर रही है जो बिलकुल कटे हुए हैं। इस काम में बछेंद्री के नियोक्ता टाटा का भी अहम योगदान है।
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देश-दुनिया से कट चुके गांवों में राहत पहुंचाई
इस वक्त उत्तराखंड में कुदरत की मारकर देश-दुनिया से कट चुके गांवों में राहत पहुंचाना एवरेस्ट छूने से कम कठिन कार्य नहीं है। इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है विश्वप्रसिद्ध महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल की महिला टीम। इसमें 48 साल की प्रेमलता अग्रवाल भी शामिल हैं जिन्होंने हाल में ही सर्वाधिक आयु में एवरेस्ट को फतह करने का कारनामा अंजाम दिया है।
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टीम की हर सदस्य अपनी पीठ पर कम से कम 25 किलो राशन और दूसरी चीजें जरूरी चीजें बांधकर ले जाती है। ऐसे इलाकों में जहां शासन-प्रशासन अभी तक नहीं पहुंचा, जहां लोग बेहद जरूरतमंद हैं वहां बछेंद्री की टीम देवदूतों की तरह राहत सामग्री मुहैया करवा रही है। हालांकि जिस पैमाने पर त्रासदी हुई है उसमें ऐसे कई प्रयासों की जरूरत है। लेकिन इससे इनके जज्बे का की अहमियत कम नहीं हो जाती।
बछेंद्री पाल ने की अपील
अब तक उनकी टीम पिलंग, जौड़ाव, न्यू डिडसारी के साथ ही स्याबा, बायणा, लौंथरू, डिडसारी, सालू, सौरा, कामर, ढासड़ा, सिरोर, अठाली गांव तक पहुंच चुकी है। बछेंद्री पाल ने बताया कि सरकारी हेलीकाप्टरों की मदद न मिलने से दूरस्थ गांवों तक रसद पहुंचाने में दिक्कत आ रही है।
उन्होंने बताया कि जल्द ही विस्तृत सर्वेक्षण कर किसी गांव को गोद लेकर उसके विकास की दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी। बछेंद्री मददगारों से अपील करती हैं, बेशक उत्तराखंड में आपदा आई है लेकिन मदद करते समय लोग स्वाभिमानी उत्तराखंडियों की भावना का ख्याल रखें। उन्हें फटे-पुराने कपड़ों, खराब क्वालिटी के खाने-पीने की वस्तुएं न दें।
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