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उत्तराखंड में 30 मार्च को चालू होगी एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन

Fri, 18 Mar 2016 03:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 18 Mar 2016 03:35 PM IST
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Asia's largest telescope will inaugurate by pm modi
एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन - फोटो : file photo

नैनीताल जिले के देवस्थल में आधुनिक तकनीक से लैस एशिया के सबसे बड़े टेलीस्कोप की शुरुआत भी आधुनिक ढंग से होगी। 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेल्जियम में बैठकर बटन दबाएंगे और देवस्थल में लगा टेलीस्कोप एक्टिवेट हो जाएगा।

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3.6 मीटर व्यास का यह टेलीस्कोप सभी प्रकार के प्रयोग तथा परीक्षण सफल रहने के बाद अब कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसका एक्टिवेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस माह के अंत में अपनी तीन दिवसीय विदेश यात्रा के दौरान बेल्जियम से करेंगे। बेल्जियम इसलिए क्योंकि इस दूरबीन की स्थापना में जर्मनी, रूस और बेल्जियम का महत्वपूर्ण योगदान है।
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खासतौर पर इसके लैंस को तैयार करने में बेल्जियम के वैज्ञानिकों ने विशेष भूमिका निभाई है। टेलीस्कोप में सात फीसदी अंशदान भी बेल्जियम का है।

नए आकाशीय पिंडों की खोज में सहायता

Asia's largest telescope will inaugurate by pm modi
एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन - फोटो : file photo

इस टेलीस्कोप परियोजना की परिकल्पना 1980 में की गई थी। इसकी स्थापना के लिए देवस्थल के चयन के बाद 2007 में कार्य शुरू किया गया। 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवस्थल से आकाश का बहुत बड़ा हिस्सा नजर आता है।

यहां कोहरा भी कम रहता है। यहां के धूल तथा प्रदूषण विहीन वातावरण से आकाश का अध्ययन बेहतर तरीके से हो सकता है। इसी के चलते इस परियोजना के लिए देवस्थल का चयन किया गया था। यहां स्थापित टेलीस्कोप 360 डिग्री के कोण पर घूमकर किसी भी बिंदु पर स्थिर होकर आकाश का विस्तृत अध्ययन करने में सक्षम है।

यह टेलीस्कोप मुख्यत: धुंधले नजर आने वाले तारों, नई आकाश गंगाओं तथा सुदूरवर्ती तारों के समूह के अध्ययन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।

टेलीस्कोप का रिमोट टेक्निकल एक्टिवेशन 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेल्जियम स्थित शोध केंद्र से बटन दबाकर करेंगे। हालांकि देवस्थल में इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन बाद में किया जाएगा। टेलीस्कोप से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विश्व भर के वैज्ञानिक अंतरिक्ष तथा तारों की कुंडली खंगालेंगे। इससे अंतरिक्ष के अबूझ रहस्यों को समझने, नई जानकारियां प्राप्त करने और नए आकाशीय पिंडों की खोज में सहायता मिलेगी।
- डॉ. वहाबुद्दीन, निदेशक, आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज)

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