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सेना न होती तो जिंदा न लौट पाते
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2013 11:54 AM IST
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सेना न होती तो जिंदा नहीं लौट पाते, घांघरिया में चार दिन फंसे रहे इस बीच पत्नी को अटैक पड़ गया, सेना ने हेलीकाप्टर से जोशीमठ अस्पताल पहुंचाया तो जान बच गई। यह कहना है पटियाला के पिंड सनोर गांव निवासी गुलजार सिंह का।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
पत्नी के साथ श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर गए गुलजार आपदा के चलते श्री हेमकुंड साहिब में भी मत्था नहीं टेक पाए। जिन्हें घांघरिया से वापस लौटना पड़ा।
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चमोली में जमकर कहर बरपा
श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर गए गुलजार बताते हैं कि चमोली जिले में जमकर कहर बरपा है। 15 जून को वे पत्नी नरेंद्र कौर सहित सात लोगों के साथ गोंविदघाट से श्री हेमकुंड साहिब के लिए निकले थे और इसी रोज शाम को घांघरिया पहुंच गए थे, लेकिन रात साढ़े ग्यारह बजे घांघरिया से आगे हेमकुंड साहिब मार्ग पर पुल बह गया।
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मां, मत रो, मैं जिंदा हूं
यात्रा के इस पड़ाव में अफरातफरी मच गई। हालत यह थी कि न तो श्री हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ पाए न ही वापस लौट पाए। जगह-जगह मार्ग क्षतिग्रस्त होने से चार दिन तक यहीं फंसे रहे। इस बीच पत्नी को भी अटैक पड़ गया।