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लगातार बारिश तबाह कर देगी आम को
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 13 Mar 2016 12:54 AM IST
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हसनपुर में पेड़ पर लगा बाौर।
- फोटो : amar ujala
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मौसम के बिगड़े मिजाज से दुनिया के कई देशों में मशहूर अमरोहा के आम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शनिवार को आई आंधी-बारिश ने आम के बगीचों को झकझोर कर रख दिया, गनीमत रही कि अभी बौरों में अंडे नहीं बने थे। वर्ना मुश्किल बढ़ सकती थी। किसानों-कारोबारियों का कहना है कि, अगर मौसम लगातार कई दिन खराब रहा तो उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। इसको लेकर बाग मालिकों और निर्यातकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं।
जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर जमीन पर आम के बगीचे हैं। प्रदेश सरकार ने हसनपुर-गजरौला, अमरोहा-जोया के नाम से आम पैदावार के लिए दो फलपट्टियां भी घोषित कर रखीं हैं। प्रतिवर्ष अमरोहा के बगीचों में पैदा होने वाला आम आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अरब देशों के अलावा यूरोप में भी निर्यात किया जाता है।
इस बार आम का बौर अच्छा आने से किसान और कारोबारियों में उत्साह था, लेकिन शनिवार को बदले मौसम ने किसानों को चिंति कर दिया है। बेमौसम आंधी-बारिश और हल्की ओलावृष्टि से कुछ बौर भी झड़ गए, मगर अभी बौरों में अंडे नहीं बनने से बड़ा नुकसान बच गया। बाग मालिकों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से 10-15 फीसदी पैदावार कम हो सकती है। फिलहाल नुकसान का आकलन कल के बाद ही हो सकेगा।
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यहां भेजा जाता है अमरोहा का आम
हर साल अरब देशों के साथ ही पाकिस्तान, स्विटजरलैंड, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया आदि देशों में अमरोहा के आम की सप्लाई होती है। यहां का चौसा मशहूर है, खाड़ी देशों में भेजा जाता है। आम्रपाली और मल्लिका (सुनहरी)देर में पकते हैं। इनकी खाड़ी देशों में विशेष मांग है। चौसा सबसे देर से होता है। सबसे पहले दशहरी की सप्लाई शुरू होती है।
5471 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हैं फलपट्टी
अमरोहा। जिले में 5471 हेक्टेयर क्षेत्र में आम के बगीचे लगे हैं। हसनपुर-गजरौला के बीच आम के बगीचे हैं। वहीं अमरोहा और जोया इलाके में कांठ रोड, सोनाली, कैलसा रोड, नौगावां रोड पर आम के बगीचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से बौर झड़ने के साथ ही बौर पर आने वाले पैदावार में सहयोगी भुनके मर जाते हैं, जोकि आम का दाना बनने में सहायक होते हैं।
क्या कहते हैं आम कारोबारी
इस बार आम की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है, लेकिन यदि ऐसा ही मौसम रहा तो बाग मालिकों के अरमानों पर पानी फिर सकता है। पिछले वर्ष के नुकसान की भरपाई इस बार होने की उम्मीद थी। लेकिन शनिवार की आंधी-बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। 10-15 फीसदी नुकसान हो सकता है। यदि कल भी मौसम खराब रहा तो बड़ा नुकसान होगा। फिर भी बचे हुए बौर की हिफाजत बाग मालिक कर रहे हैं। -नदीम सिद्दीकी प्रदेश अध्यक्ष आम एक्सपोर्ट एसोसिएशन
शनिवार की आंधी-बारिश से आम की पैदावार पर असर पड़ सकता है। यदि मौसम में ठंडक लौटी तो नुकसान होगा। इस बार आम का अच्छा बौर आया था। पिछले साल का घाटा इस बार पूरा होने की उम्मीद थी। लेकिन शनिवार की आंधी-बारिश ने बाग मालिकों और कारोबारियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। -डा.सिराजुद्दीन हाशमी आम उत्पादक
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जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर जमीन पर आम के बगीचे हैं। प्रदेश सरकार ने हसनपुर-गजरौला, अमरोहा-जोया के नाम से आम पैदावार के लिए दो फलपट्टियां भी घोषित कर रखीं हैं। प्रतिवर्ष अमरोहा के बगीचों में पैदा होने वाला आम आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अरब देशों के अलावा यूरोप में भी निर्यात किया जाता है।
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इस बार आम का बौर अच्छा आने से किसान और कारोबारियों में उत्साह था, लेकिन शनिवार को बदले मौसम ने किसानों को चिंति कर दिया है। बेमौसम आंधी-बारिश और हल्की ओलावृष्टि से कुछ बौर भी झड़ गए, मगर अभी बौरों में अंडे नहीं बनने से बड़ा नुकसान बच गया। बाग मालिकों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से 10-15 फीसदी पैदावार कम हो सकती है। फिलहाल नुकसान का आकलन कल के बाद ही हो सकेगा।
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यहां भेजा जाता है अमरोहा का आम
हर साल अरब देशों के साथ ही पाकिस्तान, स्विटजरलैंड, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया आदि देशों में अमरोहा के आम की सप्लाई होती है। यहां का चौसा मशहूर है, खाड़ी देशों में भेजा जाता है। आम्रपाली और मल्लिका (सुनहरी)देर में पकते हैं। इनकी खाड़ी देशों में विशेष मांग है। चौसा सबसे देर से होता है। सबसे पहले दशहरी की सप्लाई शुरू होती है।
5471 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हैं फलपट्टी
अमरोहा। जिले में 5471 हेक्टेयर क्षेत्र में आम के बगीचे लगे हैं। हसनपुर-गजरौला के बीच आम के बगीचे हैं। वहीं अमरोहा और जोया इलाके में कांठ रोड, सोनाली, कैलसा रोड, नौगावां रोड पर आम के बगीचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से बौर झड़ने के साथ ही बौर पर आने वाले पैदावार में सहयोगी भुनके मर जाते हैं, जोकि आम का दाना बनने में सहायक होते हैं।
क्या कहते हैं आम कारोबारी
इस बार आम की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है, लेकिन यदि ऐसा ही मौसम रहा तो बाग मालिकों के अरमानों पर पानी फिर सकता है। पिछले वर्ष के नुकसान की भरपाई इस बार होने की उम्मीद थी। लेकिन शनिवार की आंधी-बारिश ने मुसीबत खड़ी कर दी है। 10-15 फीसदी नुकसान हो सकता है। यदि कल भी मौसम खराब रहा तो बड़ा नुकसान होगा। फिर भी बचे हुए बौर की हिफाजत बाग मालिक कर रहे हैं। -नदीम सिद्दीकी प्रदेश अध्यक्ष आम एक्सपोर्ट एसोसिएशन
शनिवार की आंधी-बारिश से आम की पैदावार पर असर पड़ सकता है। यदि मौसम में ठंडक लौटी तो नुकसान होगा। इस बार आम का अच्छा बौर आया था। पिछले साल का घाटा इस बार पूरा होने की उम्मीद थी। लेकिन शनिवार की आंधी-बारिश ने बाग मालिकों और कारोबारियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। -डा.सिराजुद्दीन हाशमी आम उत्पादक